चूंकि “रॉबर्ट हुक” द्वारा खोजी गयी कोशिकाएँ मृत पादप कोशिकाएँ थी अतः “रॉबर्ट हुक” को मृत पादप कोशिका का खोजकर्ता कहा जाता है। जीवित कोशिका की खोज का श्रेय डच वैज्ञानिक “एंटोन वैन लीवेनहोइक” (Anton van Leeuwenhoek) को जाता है।

कोशिका से परिचय (Introduction to cell in hindi)

जब भी विज्ञान के भीतर जीवन की बात हो एवं बहुत बारीकी के साथ तथ्य दिए जा रहे हों तो जीवन की मौलिक इकाई कही जाने वाली बेहद ही छोटी जीवित इकाई कोशिका (Cell) को कैसे नकारा जा सकता है।

कोशिका पृथ्वी में पाई जाने वाली जीवन की सबसे छोटी इकाईयाँ हैं। इसलिए इतने छोटे आकार होने के कारण कोशिकाओं का प्रेक्षण करने के लिए हमें उचित क्षमता के सूक्ष्मदर्शी की आवश्यकता होती है।

लेकिन क्या आपने कभी जानने की कोशिश की है कि “तकनीक की कमी के चलते भी आखिर कैसे वैज्ञानिकों ने 17वीं शताब्दी में ही कोशिका की खोज कर दी” अगर हाँ। तो इस लेख को पढ़ लीजिये इस लेख के माध्यम से आप जान पाएंगे कि कोशिका की खोज किसने की थी और कैसे की थी (Koshika ki khoj kisne ki thi) ?

koshika ki khoj kisne ki thi
koshika ki khoj kisne ki thi

कोशिका क्या है (koshika kya hai)

सरल शब्दों में कहा जाए तो कोशिका शरीर की वह सबसे छोटी इकाई है, जो शरीर की जीवन जीने योग्य सूक्ष्म परन्तु महत्वपूर्ण क्रियाओं को पूर्ण करने में एक अहम भूमिका निभाती है। इसलिए इसे जीवन की मौलिक इकाई भी कहा जाता है।

यदि बात की जाए इंसानी शरीर की तो सामान्य मनुष्य का शरीर कई अरबों – खरबों कोशिकाओं से मिलकर बना होता है लेकिन इन अरबों – खरबों कोशिकाओं को उनके प्रकार के आधार पर वर्गीकृत किया जाए तो पता चलता है कि मनुष्य के शरीर में कोशिकाओं के लगभग 200 अलग अलग प्रकार पाए जाते हैं, एवं ये सभी कोशिकाओं के प्रकार यूकेरियोटिक कोशिकाओं (Eukaryotic cells) की श्रेणी के अंतर्गत आते हैं।

कोशिका के प्रकार (koshika ke prakar)

कोशिका को दो मुख्यतः भागो में बांटा गया है।

प्रोकैरियोटिक कोशिका (prokaryotic cells in hindi)

वे सभी कोशिकाएं जिनमें कोशिका की आंतरिक झिल्ली के अभाव के कारण कोशिका में केंद्र नहीं पाया जाता है, प्रोकैरियोटिक कोशिका कहलाते हैं।

उदाहरण – सभी प्रकार के एककोशिकीय जीव (बैक्टीरिया, अमीबा) आदि।

यूकेरियोटिक कोशिका (Eukaryotic cells in hindi)

वे कोशिकाएं जिनमें केंद्र की उपस्थिति होती है, यूकेरियोटिक कोशिकाएँ कहलाती हैं। उदाहरण- मनुष्य, पादप (पेड़-पौधे), कवक आदि।

कोशिका के प्रकार
कोशिका के प्रकार

मनुष्य शरीर से लेकर सभी जीव जंतु तथा पेड़ पौधे यूकेरियोटिक कोशिकाओं से मिलकर बने होते है। जबकि सभी एककोशिकीय जैसे अमीबा, बैक्टीरिया जीव प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं के बने होते हैं।

हालांकि मनुष्य एवं पादप (पेड़-पौधे) कोशिकाएँ यूकेरियोटिक कोशिका के अंतर्गत तो आती हैं लेकिन ये कोशिकाएँ भी कई परिप्रेक्ष्यों के आधार पर एक दूसरे से भिन्न हैं।

जंतु कोशिका एवं पादप कोशिका
जंतु कोशिका एवं पादप कोशिका

कोशिका की खोज (koshika ki khoj)

कोशिका की खोज किसने की थी और कैसे की थी (koshika ki khoj kisne ki thi aur kaise ki thi)

आमतौर पर कोशिका के खोजकर्ता के रूप में “रॉबर्ट हुक” (Robert hook) को जाना जाता है। जिन्होंने खुद ही सूक्ष्मदर्शी बनाकर उसकी मदद से सन 1665 में कोशिका की खोज की। उन्होंने एक छोटे से कॉर्क के टुकड़े में सूक्ष्मदर्शी कि सहायता से बेहद ही छोटी छोटी बॉक्सनुमा संरचना देखी एवं उन्हें शुरुआत में देखने पर यह संरचना मधुमक्खी के छत्ते जैसी लगी।

क्योंकि हुक के अनुसार यह सूक्ष्म बॉक्स (स्थान) भिक्षुओं/साधुओं के रहने वाले कमरों के जैसे लगते थे जिन्हें cella कहा जाता था। इसलिए उन्होंने इन सूक्ष्म बॉक्स (स्थान) को Cell (कोशिका) का नाम दिया।

हुक ने कोशिकाओं पर 60 से भी ज्यादा अलग-अलग प्रेक्षण किये जिनके बारे में उन्होंने अपनी किताब Micrographia (माइक्रोग्राफिया) में बताया है।

हालांकि “हुक” कोशिका की खोज तो कर चुके थे लेकिन क्योंकि उस समय सूक्ष्मदर्शी के निर्माण की शुरुआत ही थी इसलिये उस समय उनका सूक्ष्मदर्शी बेहद ही कम आवर्धन क्षमता का था, जिस कारण से “रॉबर्ट हुक” उन पादप कोशिकाओं (plant cells) के असल आकार एवं इन कोशिकाओं के कार्य का पता नहीं लगा पाए साथ ही वह यह भी जानने में असफल रहे कि कोशिका के भीतर भी अन्य कई प्रकार के सूक्ष्म अवयव हैं जो कोशिका के साथ साथ शरीर के लिए भी अहम भूमिका निभाते हैं।

मृत कोशिका की खोज किसने की थी (Mrit koshika ki khoj kisne ki thi)

रॉबर्ट हुक
रॉबर्ट हुक

चूंकि “रॉबर्ट हुक” द्वारा खोजी गयी कोशिकाएँ मृत पादप कोशिकाएँ थी अतः “रॉबर्ट हुक” को मृत पादप कोशिका का खोजकर्ता कहा जाता है।

तो “रॉबर्ट हुक” कोशिका की खोज कर चुके थे, लेकिन क्या यह खोज इस सूक्ष्म जीव विज्ञान एवं कोशिकाओं की सम्पूर्ण खोज थी ? ” जी नहीं” रॉबर्ट हुक द्वारा की गई यह खोज इस सूक्ष्म जीव विज्ञान को मात्र 20 से 25 % तक ही प्रभावित कर पाई।

जीवित कोशिका की खोज किसने की थी (Jeevit koshika ki khoj kisne ki thi)

जीवित कोशिका की खोज का श्रेय डच वैज्ञानिक “एंटोन वैन लीवेनहोइक” (Anton van Leeuwenhoek) को जाता है।

एंटोन वैन लीवेनहोइक
एंटोन वैन लीवेनहोइक

क्योंकि इस विषय का अन्य हिस्सा डच वैज्ञानिक से जुड़ा है, जिनका नाम था  “एंटोन वैन लीवेनहोइक” (Anton van Leeuwenhoek) उन्होंने सन 1674 में “हुक” के सूक्ष्मदर्शी से 10 गुना बेहतर आवर्धन क्षमता का एक लैंस का सूक्ष्मदर्शी स्वयं बनाया।

और उसकी मदद से उन्होंने कई तरह की जीवित कोशिकाएं एवं गतिमान एककोशिकीय जीव देखे (वे सूक्ष्म जीव जिनका शरीर मात्र एक ही कोशिका से निर्मित होता है एक कोशिकीय जीव कहलाते हैं)।

उन्होंने रक्त में रक्त कणिकाएँ, वीर्य में शुक्राणु जैसी कोशिकाएं एवं जल के विभिन्न नमूनों में शैवाल (Algae), प्रोटोजोवा, बैक्टीरिया आदि का सर्वप्रथम प्रेक्षण किया एवं विश्व को इससे अवगत कराया।

सन 1676 को “एंटोन वैन लीवेनहोइक ” ने अपनी इन खोजों से विश्व को अवगत कराने के लिए Royal Society of London को पत्र लिखा एवं कोशिकाओं के सही आकार के साथ साथ उनके कई अलग अलग प्रकार एवं उनके कार्य के बारे में भी बताया।

“एंटोन वैन लीवेनहोइक” द्वारा की गयी विभिन्न तरह के सूक्ष्म जीवों की इस खोज ने विज्ञान को इन एककोशिकीय जीवों तथा विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया से मनुष्य के जीवन पर होने वाले अच्छे बुरे प्रभाव के बारे में बताया।

और वैज्ञानिक जान पाए कि हमारे खाने पचाने की क्रिया से लेकर दूध के दही बनाने जैसी कई ऐसी क्रियाएं जो मनुष्य के जीवन को सीधा प्रभावित करती हैं, उनके पीछे बैक्टीरिया बहुत बड़ा कारण हैं।

कोशिका के कार्य (koshika ke kary)

हालांकि कोशिका का आकार बेहद ही सूक्ष्म तो है लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि शरीर में इनकी अहमितता भी इतनी ही सूक्ष्म है, क्योंकि कोशिकाएँ इंसानी शरीर को आकार, आवश्यक पोषक तत्व देने में तो मदद करती हैं ही साथ ही साथ ये कोशिकाएँ शरीर में भोजन को ऊर्जा में बदल कर उस ऊर्जा का प्रयोग करके शरीर के विकास एवं अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में भी मदद करती हैं।

ठीक इसी प्रकार पादप कोशिकाओं में मौजूद क्लोरोप्लास्ट सूर्य के प्रकाश को प्रकाश संस्लेषण द्वारा ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं, एवं यह ऊर्जा पौधों के विकास में अहम भूमिका निभाती है साथ ही इसी क्रिया के जरिये पौधे अपने भोजन का निर्माण भी कर पाते हैं।

एककोशिकीय एवं बहुकोशिकीय जीव

हालांकि मनुष्य एवं पेड़ पौधे विभिन्न तरह की कोशिकाओं से मिलकर बने हैं, इसलिए इन्हें बहुकोशिकीय जीव कहा जाता है।

लेकिन इस धरती पर कई ऐसे सूक्ष्म जीव भी हैं जो मात्र एक ही कोशिका से निर्मित हैं, इसलिए इन्हें एककोशिकीय जीव कहा जाता है। उदाहरण – पैरामीसियम,अमीबा इत्यादि।

एककोशिकीय एवं बहुकोशिकीय जीव
एककोशिकीय एवं बहुकोशिकीय जीव

कोशिका के बारे में जानकारी तथा कुछ रोचक तथ्य

● मनुष्य के शरीर की पाए जाने वाली सबसे बड़ी कोशिका मादा अंडाणु, सबसे छोटी कोशिका शुक्राणु एवं शरीर की सबसे लंबी कोशिका तांत्रिका कोशिका है।

● मादा अंडाणु जो की मनुष्य शरीर की सबसे बड़ी कोशिका है लेकिन फिर भी इसे नग्न आँखों से देखा जाना सम्भव नहीं है।

● पृथ्वी पर पाई जाने वाली सबसे बड़ी जंतु कोशिका शुतुरमुर्ग के अंडे की कोशिका होती है, जो 170×135 माइक्रोमीटर की होती है। जबकि वहीं अगर सम्पूर्ण पृथ्वी पर मौजूद सबसे बड़ी पादप कोशिका की बात की जाए तो वह कोरुल्पा टैक्सीफोलिया (Caulerpa taxifolia) नामक कोशिका है जिसकी लम्बाई 6 से 12 इंच तक हो सकती है।

● अधिकतर कोशिकाएं प्रोटीन की बनी होती हैं।

● कोशिकाएं इस ग्रह पर मौजूद सबसे छोटी जीवन इकाईयां हैं। ये स्वयं में इतनी सक्षम हैं कि शरीर की जरूरत के अनुसार ये स्वयं ही नष्ट एवं स्वयं ही पैदा हो जाती हैं।

यह भी पढ़ें- न्यूट्रॉन की खोज किसने की थी एवं कैसे की थी

यह भी पढ़ें- प्रोटॉन की खोज किसने की थी (Proton ki khoj kisne ki thi)

Conclusion

हालांकि कोशिकाओं के आकार की सीमा काफी सूक्ष्म होती है, लेकिन इन सूक्ष्म सी कोशिकाओं के इतिहास के साथ साथ कोशिकाओं के विज्ञान की सीमा पर नजर डाली जाए तो वह सूक्ष्म ना होकर बेहद ही विस्तृत है। जिसके बारे में विस्तृत रूप से आप इस आर्टिकल “कोशिका की खोज किसने की थी और कैसे की थी (Koshika ki khoj kisne ki thi aur kaise ki thi)” को पढ़ कर जान ही गये होंगे।

तो यह थी कोशिका के बारे में जानकारी एवं कोशिका की खोज के बारे में संपूर्ण जानकारी। आशा है कि कोशिका की खोज के बारे में इस लेख के माध्यम से आपको इस बारे में आपके सभी सवालों के उचित जवाब मिल गए होंगे अगर फिर भी आपका कोई सवाल या सुझाव रह गया हो तो हमें Comment Section में जरूर बताएं।

मृत कोशिका की खोज किसने की थी ( koshika ki khoj kisne ki thi)

मृत कोशिका की खोज रॉबर्ट हुक ने की थी।


जीवित कोशिका की खोज किसने की थी (jeevit koshika ki khoj kisne ki thi)

जीवित कोशिका की खोज डच वैज्ञानिक “एंटोन वैन लीवेनहोइक” ने सन 1674 में जीवित कोशिका की खोज की थी।


कोशिका भित्ति को खोज किसने की थी (Koshika bhitti ki khoj kisne ki thi)

कोशिका भित्ति की खोज भी रॉबर्ट हुक ने ही की थी।

प्रातिक्रिया दे