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बुध ग्रह का परिचय (Introduction of Mercury planet in hindi)

बुध ग्रह (Mercury planet in hindi) हमारे सौरमण्डल का पहला एवं आकार की दृष्टि से सबसे छोटा ग्रह है। हम जानते हैं कि बुध सूर्य के सबसे नज़दीक मौजूद ग्रह है, जिस कारण सूर्य के प्रकाश को बुध की सतह तक पहुंचने में मात्र 3.2 मिनट का समय लगता है,और ठीक इसी तरह से अगर आप बुध की सतह पर खड़े होकर सूर्य को देखें तो पृथ्वी की अपेक्षा में बुध की सतह से सूर्य आपको तीन गुना बड़ा दिखाई देगा।

बुध ग्रह की स्थिति के कारण यह पृथ्वी से आसानी से देखा या ऑब्जर्व नहीं किया जा सकता है। प्रत्येक 100 सालों में मात्र 13 बार ही बुध ग्रह पृथ्वी और सूर्य के ठीक बीच से गुजरता है जिस वजह से हर शताब्दी में सिर्फ 13 बार ही बुध ग्रह को पृथ्वी से आसानी से देखा जा सकता है।

यह खगोल विज्ञान की विशेष घटना Transit कहलाती है, अगली बार Transit घटना 13 नवम्बर 2032 को होने वाली है।

Mercury Planet

बुध ग्रह का इतिहास (History of Mercury planet in hindi)

सूर्य के चारों ओर बुध ग्रह की तीव्र गति के कारण इसका नाम रोमन समाज के संदेशवाहक देवता के नाम पर Mercury रखा गया।

चूंकि वर्तमान में हम बुध ग्रह के बारे में अन्य सभी ग्रहों की तुलना में बेहद ही कम जानते हैं लेकिन बुध ग्रह का इतिहास देखा जाए तो पता चलेगा कि बुध ग्रह उन ग्रहों में से एक ग्रह है जिसका इतिहास कई हजार साल पुराना है, माना जाता है कि बुध ग्रह को करीब 5000 साल पहले सुमेरियन काल से जाना जाता है। यहाँ तक कि हिन्दू धर्म के अथर्ववेद में भी बुध ग्रह के बारे में बताया गया है।

16 वीं शताब्दी में निकोलस कोपरनिकस ने भी अपने मॉडल में बुध ग्रह का जिक्र किया था।

एवं 17 वीं शताब्दी में बुध ग्रह को महान खगोलविद गैलिलियो गैलिली एवं थॉमस हैरियट द्वारा सर्वप्रथम दूरबीन से देखा गया।

Mercury planet in hindi
बुध ग्रह

बुध ग्रह की संरचना एवं निर्माण (Structure and Formation of Mercury planet in hindi)

बुध ग्रह का निर्माण आज से करीब 4.5 अरब साल पहले गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा आस पास मौजूद गैस एवं धूल के एक साथ संगठित होने से हुआ।

बुध ग्रह हमारे सौरमण्डल में मौजूद 4 स्थलीय ग्रहों (Terrestrial Planets) में से एक है।

बुध ग्रह हमारे सौरमण्डल में पृथ्वी के बाद दूसरा सबसे अधिक घनत्व वाला ग्रह है क्योंकि बुध ग्रह के पास धात्विक कोर एवं ठोस मेंटल है तथा इसकी ऊपरी सतह ठोस सिलिकेट चट्टानों की बनी हुई है।

इसका धात्विक कोर 2074 किलोमीटर त्रिज्या का है जो कि पूरे ग्रह की त्रिज्या का लगभग 85 प्रतिशत है,जबकि इस ग्रह के मेन्टल की त्रिज्या मात्र 400 किलोमीटर ही है।

बुध ग्रह की सतह (Surface of Mercury planet in hindi)

बुध की सतह पृथ्वी के चंद्रमा से मिलती जुलती है जिसमें उल्का पिंडों और धूमकेतुओं से टकराव के परिणामस्वरूप कई बड़े बड़े गड्ढे (Craters) निर्मित हैं। जिनमें बुध ग्रह का सबसे बड़ा गढ्ढा (Crater) The Caloris Basin है, जिसका व्यास लगभग 1,550 किलोमीटर है इसे सन 1974 में NASA के Mariner 10 अंतरिक्ष यान द्वारा खोजा गया था।

बुध ग्रह की सतह
बुध ग्रह की सतह
image source- NASA

और यदि बुध ग्रह के सतही तापमान की बात करें तो ये बेहद ही भयावह है जो दिन के समय (सूर्य की उपस्थिति) में बेहद ही गर्म करीब 430℃ एवं रात के समय (सूर्य की अनुपस्थिति) में बेहद ही ठंडा करीब -180℃ तक पहुँच जाता है।

दिन के समय इतना अधिक तापमान होने के बावजूद भी बुध हमारे सौरमण्डल का दूसरा सबसे गर्म ग्रह है।

वायुमंडल की अनुपस्थिति के कारण बुध ग्रह इस गर्मी को बनाते नहीं रख पाता है इसलिए सूर्य की अनुपस्थिति के साथ ही बुध का तापमान गिरना शुरू हो जाता है एवं कई बार तो यह तापमान दिन के तापमान से 500 से 600℃ तक नीचे गिर जाता है।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि बुध ग्रह के उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव पर भी बर्फ पाए जाने के सबूत मिले हैं एवं वैज्ञानिक मानते हैं कि यह बात सच भी हो सकती है जिसके पीछे का कारण यह है कि बुध अपने अक्ष पर मात्र 2 डिग्री ही झुका हुआ है, जिसका सीधा सा मतलब है कि बुध अपने अक्ष पर लगभग सीधा होकर ही सूर्य का चक्कर लगाता है जिससे बुध ग्रह के उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव में मौसम के ना बदलने के कारण बुध के उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव में मौजूद गहरे गड्ढों (craters) में हमेशा स्थायी रूप से ही सूर्य के प्रकाश की अनुपस्थिति रहती है, जिसके कारण इन गड्ढ़ों (craters) पर कुछ मात्रा में बर्फ पाई जा सकती है।

बुध ग्रह का घूर्णन एवं परिक्रमा (Rotation and Revolution of Mercury planet in hindi)

बुध ग्रह सूर्य से 5,79,09,227 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है एवं बुध ग्रह सूर्य की परिक्रमा 47 किलोमीटर प्रति सेकेंड की गति से लगभग 88 पृथ्वी दिन में पूरी करता है, जो कि हमारे सौरमण्डल में मौजूद अन्य सभी ग्रहों से तेज है।

इतना तीव्र परिक्रमण काल होने के बावजूद भी बुध का घूर्णन काल बहुत ही धीमा है, जिससे बुध का एक दिन करीब 58.646 पृथ्वी दिन के बराबर का होता है।

और यदि बात करें बुध के एक सौर दिन (यानी कि बुध ग्रह की सतह पर एक सुबह से दूसरी सुबह होने में लिया गया समय) की तो यह 176 पृथ्वी दिन यानी कि बुध के 2 वर्षों के बराबर का होता है।

बुध ग्रह की कक्षा (Orbit of Mercury planet in hindi)

कैपलर के नियम एवं वैज्ञानिकों के अवलोकन से हम जानते हैं कि सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्ताकार मार्ग में चक्कर लगाते हैं, ठीक इसी तरह बुध ग्रह भी सूर्य का चक्कर दीर्घवृत्ताकार मार्ग में लगाता है लेकिन बुध ग्रह का परिक्रमण मार्ग सौरमण्डल में मौजूद अन्य सभी ग्रहों से अधिक दीर्घवृत्तीय (Elliptical) है।

बुध ग्रह की कक्षा
बुध ग्रह की कक्षा

जिस कारण से बुध ग्रह का Perihelion (बुध का सूर्य से समीपक बिंदु) सूर्य से लगभग 4,70,000,00 किमी. एवं Aphelion (बुध का सूर्य से दूरस्थ बिंदु) सूर्य से लगभग 7,00,000,00 किमी. पर है।

[ दीर्घ्वर्त्त की कुछ विशेषताएँ – ग्रहों द्वारा अपनाये जाने वाले इस दीर्घवृत्ताकार मार्ग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस मार्ग में दो मुख्य बिंदु/स्थान होते हैं – Perihelion एवं Aphelion. जिसमें Perihelion(सूर्य समीपक बिंदु) वह बिंदु/स्थान होता है,जहाँ पर कोई ग्रह, क्षुद्रग्रह एवं धूमकेतु सूर्य के सबसे नजदीक होते हैं। एवं Aphelion (सूर्य दूरस्थ बिंदु) वह बिंदु/स्थान होता है,जहाँ पर कोई ग्रह, क्षुद्रग्रह एवं धूमकेतु सूर्य से सबसे दूर मौजूद होता है। ]

18 वीं शताब्दी तक भी वैज्ञानिक बुध के बारे में बहुत ही कम जान पाए थे फिर सन 1859 में एक फ़्रेंच वैज्ञानिक ली वेरियर (Le Verrier)द्वारा सर्वप्रथम यह देखा गया कि बुध ग्रह का Perihelion बिंदु न्यूटन के द्वारा की गई गणना के अनुसार ना चलते हुए उससे थोड़ा तेज गति कर रहा है।

बुध ग्रह की एक कक्षा में अनियमितता
बुध ग्रह की एक कक्षा में अनियमितता
gif source- Wikipedia

अब वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह था कि आखिर किस कारण से बुध द्वारा यह अनियमित गति दिखाई जा रही है। कई सालों तक अलग अलग कल्पनाएं करने के बाद भी वैज्ञानिक इस सवाल का जवाब नहीं ढूंढ पाए थे।

बुध ग्रह की अनियमित कक्षा
बुध ग्रह की अनियमित कक्षा

और फिर समय आया सन 1916 का जब महान भौतिक वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन (Albert Einstein) ने पूरे विश्व को अपनी सापेक्षतावाद के सिद्धांत(general theory of relativity) के जरिये इस सवाल का जवाब दिया।

आइंस्टीन की general theory of relativity के अनुसार गुरुत्वाकर्षण एक आकर्षक बल ना होकर स्पेस टाइम में भार वाली वस्तुओं द्वारा किया गया वक्र (curv) है।

इसी के अनुसार गुरुत्वाकर्षण सभी ग्रहों एवं सूर्य के लिए भी काम करता है क्योंकि सूर्य हमारे सौरमण्डल की सर्वाधिक भार वाली वस्तु है,इसलिए उसके द्वारा मोड़े (warp) गए स्पेस टाइम के कारण ही संपूर्ण सौरमण्डल सूर्य से बंधा हुआ है एवं सूर्य की परिक्रमा कर रहा है।

यदि अब बात करें बुध ग्रह के Perihelion बिंदु की गति की तो उसका कारण आइंस्टीन ने यह बताया कि बुध की गति अनियमित इसलिए लगती है क्योंकि सूर्य के अत्यंत नज़दीक मौजूद होने के कारण बुध को सूर्य द्वारा मोड़े (warp) गए सर्वाधिक अनियमित स्पेस टाइम के जरिये ही अपनी परिक्रमा करनी पड़ती है तथा सूर्य के इस अनियमित warp स्पेस टाइम का अनुसरण करना पड़ता है, जिस वजह से बुध की गति सरल सी ना होकर अनियमित है एवं साथ ही साथ बुध ग्रह के Perihelion बिंदु  की स्थिति भी स्थिर ना होकर लगातार बदलती रहती है।

एवं आइंस्टीन ने यह भी बताया कि बुध ग्रह का Perihelion बिंदु प्रत्येक शताब्दी में अपनी जगह से करीब 43″ या 43 Arc Second (1 Arc Second = 1/3600 डिग्री) खिसक जाता है। जो कि बाद में अनेक प्रेक्षणों द्वारा सही साबित हुआ।

general theory of relativity
general theory of relativity

हालांकि सौरमण्डल के अन्य सभी ग्रहों के Perihelion बिंदु भी अपनी जगह से खिसकते हैं लेकिन क्योंकि वह सूर्य से लगातार दूर हैं इसलिए उनके Perihelion बिंदु की स्थिति में आने वाला अन्तर बहुत ही छोटा होता है।

 बुध की कुछ महत्वपूर्ण भौगोलिक जानकारियाँ (Information about Mercury planet in hindi)

बुध की सूर्य से दूरी579,09,227 किलोमीटर
बुध द्वारा सूर्य की परिक्रमा में लिया जाने वाला समय (1 वर्ष)87.969 पृथ्वी दिन
बुध ग्रह द्वारा घूर्णन में लिया जाने वाला समय (1 दिन)58.646 पृथ्वी दिन
बुध का एक सौर दिन176 पृथ्वी दिन
बुध ग्रह की त्रिज्या2439.7 किलोमीटर
क्षेत्रफल7,47,97,000 किलोमीटर2
द्रव्यमान3.30 × 1023 किलोग्राम
घनत्व5.43 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर
सतह पर दाबलगभग 10-15 Bar
सतह का गुरुत्वाकर्षण3.7 मीटर प्रति सेकेंड2
पलायन वेग4.25 किलोमीटर प्रति सेकेंड2
ज्ञात प्राकृतिक उपग्रह0

बुध ग्रह का वायुमंडल (Atmosphere of Mercury planet in hindi)

बुध ग्रह के पास वायुमंडल नहीं है बल्कि एक पतला सा बहिर्मंडल मौजूद है,जो ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, हीलियम, सोडियम, मैग्नीशियम और पोटेशियम आदि तत्वों से मिलकर बना है। जो इतना सक्षम नहीं है कि सूर्य से आने वाली हानिकारक सौर हवाओं एवं अंतरिक्ष से आने वाले उल्का पिंडों को सतह पर आने से रोक ले।

एवं साथ ही साथ बुध का ये बहिर्मंडल सूर्य से आने वाली गर्मी को बनाये रखने में भी  असक्षम है, जिससे सूर्य की अनुपस्थिति में बुध का तापमान काफी अधिक गिर जाता है।

चुम्बकीय क्षेत्र (magnetic field of Mercury planet in hindi)

बुध ग्रह का चुम्बकीय क्षेत्र पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र की तुलना में बेहद ही कमजोर है,जो कि पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का 1.1% है।

लेकिन पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र की तुलना में कमजोर लगने वाला यह बुध ग्रह का आंतरिक चुम्बकीय क्षेत्र इतना मजबूत तो है कि यह ग्रह के चारों ओर फैली बहुत सी सौर हवाओं के प्रवाह को रोकते हुए इन सौर हवाओं को विक्षेपित कर लेता है। जिससे बुध ग्रह के चुम्बकीय क्षेत्र एवं सौर हवाओं के आपस में अंतःक्रिया से मैग्नेटोस्फीयर का निर्माण होता है।

हालांकि यह मैग्नेटोस्फीयर इतना छोटा होता है कि पृथ्वी के भीतर समा सकता है लेकिन यह मैग्नेटोस्फीयर सूर्य से आने वाली भयानक सौर हवाओं के साथ साथ अन्य रेडिएशन (Cosmic radiation) से भी बुध की सतह को कई हद तक बचाने में सक्षम है।

बुध ग्रह पर जीवन की सम्भावना (Possibilities of life on Mercury planet in hindi)

बुध ग्रह के तापमान में होने वाले भयानक परिवर्तन तथा वायुमंडल, तरल द्रव एवं अन्य उपयोगी गैसों की अनुपस्थिति के साथ साथ सूर्य के इतने नज़दीक होते हुए सूर्य द्वारा बुध पर पड़ने वाले प्रभावों को देखकर इस वक्त तो यही प्रतीत होता है कि बुध ग्रह पर जीवन का पनप पाना बेहद ही मुश्किल है।

बुध ग्रह पर अंतरिक्ष अभियान (Space Missions on Mercury planet in hindi)

बुध ग्रह पर आज तक सिर्फ दो ही मिशन(Mission) किये जा सके हैं जिस कारण से यह ग्रह हमारे सौरमण्डल का सबसे कम खोज बीन किया जाने वाला ग्रह बना हुआ है।

इस ग्रह पर किये गए मिशन में पहले मिशन के भीतर 3 नवम्बर 1973 में Mariner 10 को प्रक्षेपित (launch) किया गया था यह मिशन 24 मार्च 1975 तक ही चल पाया।

लेकिन इतने समयांतराल के बीच Mariner 10 बुध ग्रह की 2700 फोटो लेने में सफल रहा जिसके जरिये वैज्ञानिक बुध ग्रह के पूरी सतह के लगभग 45% के बारे में जान पाए।

इसके पश्चात नासा द्वारा बुध ग्रह पर किये गए दूसरे मिशन के तहत सन 3 अगस्त 2004 को Messenger नाम का अंतरिक्ष यान (Spacecraft) बुध पर प्रक्षेपित (launch) किया गया जो 17 मार्च 2011 को बुध ग्रह की कक्षा पर पहुंचने वाला पहला spacecraft बन गया।

तब से Messenger ने वैज्ञानिकों को बुध ग्रह की सतह के बारे में अन्य बहुत सी जानकारियाँ दी। Messenger वैज्ञानिकों को बुध ग्रह पर बर्फ की उपस्थिति के प्रमाण देने में भी सफल रहा एवं 30 अप्रैल 2015 को बुध के गुरुत्वाकर्षण के खिंचाव के कारण यह अंतरिक्ष यान बुध की सतह पर गिर गया।

बुध ग्रह के कुछ रोचक तथ्य (Amazing facts and Information about Mercury planet in hindi)

• चूंकि शुक्र (Venus) ग्रह पृथ्वी से ज्यादातर समय दूर रहता है इस वजह से मिथयाभास(Paradoxically) रूप से बुध ग्रह पृथ्वी का सबसे निकटतम ग्रह बन जाता है।

• भारतीय ज्योतिष विज्ञान(Astrology) के द्वारा बुध ग्रह के नाम पर ही हफ्ते के एक दिन का नाम बुधवार रखा गया है।

• हालांकि बुध एक ग्रह है लेकिन फिर भी यह शनि ग्रह की चंद्रमाओं गेनीमेड(Ganymede) तथा टाइटन(Titan) से यह आकार में छोटा है।

• यदि पृथ्वी पर आपका भार 50 किलोग्राम है तो बुध पर आपका भार लगभग 19 किलोग्राम होगा।

• वैज्ञानिकों के अनुसार बुध ग्रह की इसके अक्ष पर घूर्णन(Rotation) की गति वक्त के साथ धीमी होती जा रही है जिसके कारण आने वाले समय में बुध ग्रह के दिनों की अवधि समय के साथ बढ़ती जाएगी।

बुध ग्रह की झुर्रियाँ – कुछ साल पहले वैज्ञानिकों कि जाँच में उन्हें पता चला की बुध ग्रह धीरे धीरे सिकुड़ रहा है जिसके फलस्वरूप इसकी सतह पर विभिन्न तरह की बनावट बनी हुई हैं जो कि बुध ग्रह की सतह पर झुर्रियाँ सी लगती हैं। इन झुर्रियों को वैज्ञानिकों ने Lobate Scarps नाम दिया है।

Conclusion

आशा है कि “बुध ग्रह Facts and Information about mercury planet in hindi” नमक इस लेख से बुध ग्रह के बारे में आपके सभी सवालों के उचित जवाब आप को मिल गए होंगे, चाहे फिर वह बात हो बुध ग्रह की भौगोलिक जानकारी की, बुध के घूर्णन एवं परिक्रमण काल की या फिर बुध पर जीवन की उपलब्धता की।

अगर फिर भी आपका कोई सवाल या सुझाव रह गया हो तो जरूर हमें comment section में बताएं और इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें

धन्यवाद।

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