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परिचय (Introduction to Pancreas in Hindi)

हमारा शरीर समयानुसार होने वाले कई प्रकार के विकासों (क्रमागत उन्नति) के पश्चात इस स्थिति तक पहुँच पाया है जिससे आज हमारा शरीर वर्तमान के हमारे परिवेश के लिए अत्यधिक अनुकूल हो चुका है। एवं इस अनुकूलन के पीछे हमारे शरीर के सूक्ष्म से लेकर बड़े, प्रत्येक अंगों का महत्वपूर्ण योगदान है।

शरीर के एक ऐसे ही एक महत्वपूर्ण अंग का नाम है अग्न्याशय (Pancreas in Hindi)। अग्न्याशय को अंग ना कहते हुए ग्रंथि अंग कहना ज्यादा उचित रहेगा। क्योंकि शरीर में मौजूद यह ग्रंथि अंग एक मिश्रित ग्रंथि की तरह कार्य करता है। जो शरीर के कई बुनियादी विकास कार्यों के लिए जिम्मेदार है।

अक्सर लोगों के मस्तिष्क में अग्न्याशय के प्रति बहुत से सवाल उत्पन्न होते हैं, जैसे अग्न्याशय क्या है? अग्न्याशय की संरचना कैसी होती है? अग्न्याशय के कार्य? से लेकर अग्नाशय द्वारा स्रावित होने वाले हार्मोन एवं एंजाइम तथा उनका कार्य?

ऐसे और बहुत से सवालों के उचित जवाब इस लेख के माध्यम आए हमने आपको देने की कोशिश की है आशा है आपको यह लेख पसंद आएगा।

pancreas in hindi
Position Of Pancreas

अग्न्याशय क्या है (What is pancreas in hindi)

अग्न्याशय हमारे पेट में मौजूद शरीर के बुनियादी विकास में सहायता करने वाला एक महत्वपूर्ण ग्रंथि अंग है, जो हमारे शरीर में भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करने का कार्य करता है। इसकी खोज सर्वप्रथम हिरोफिलस (Herophilus) नामक ग्रीक शल्यचिकित्सक द्वारा की गयी थी।

अग्न्याशय एक द्वि-कार्यीय अथवा मिश्रित ग्रंथि अंग है, जो लगभग 95% बहिः स्रावी ग्रंथियों से तथा 5% अंतःस्रावी ग्रंथियों से मिलकर बना है। एवं इन ग्रंथियों की मदद से अग्न्याशय शरीर में भोजन के पाचन तथा खून में शुगर (blood sugar) को नियंत्रित करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य करता है।

अग्न्याशय की संरचना एवं स्थिति (About Pancreas in hindi)

यह 6 से 10 इंच लम्बा ग्रंथिअंग है जो हमारे पेट के ऊपरी हिस्से में बाँयी ओर स्थित होता है तथा अन्य ग्रन्थियों जैसे – यकृत,अमाशय एवं छोटी आंत आदि से ढ़के रहता है।

pancreas in hindi
pancreas in hindi

अग्न्याशय चपटे नाशपाती के आकार का होता है जिसके सामान्यतः चार भाग हैं, सिर (head), गर्दन (neck), शरीर (Body) और पूंछ (tail). 

अग्न्याशय का सबसे चौड़ा भाग सिर (Head) कहलाता है। जो हमारे शरीर के दांहिनी ओर स्थित रहता है इसी जगह पर छोटी आँत का पहला हिस्सा (duodenum) अग्न्याशय वाहिनी से मिलता है। और अग्न्याशय आँत में आंशिक रूप से भोजन के पचने की क्रिया के दौरान भोजन के पाचन में सरलता लाने के लिये इस वाहिनी के जरिये आँत के ग्रहणी (duodenum) में पाचक एंजाइम का स्राव करता है।

उसके पश्चात अग्न्याशय का मध्य का हिस्सा क्रमशः गर्दन (neck), शरीर body कहलाता है तथा अंत में मौजूद इसका निचला एवं सबसे पतला हिस्सा पूंछ (Tail) कहलाता है जो शरीर के बांए ओर होता है।

अग्न्याशय के कार्य (Function of pancreas in hindi, Work of Pancreas in Hindi)

अग्न्याशय शरीर में विभिन्न प्रकार के हार्मोन, एंजाइम एवं शरीर के लिए अन्य कई महत्वपूर्ण रसायनों का उत्पादन करता है। अग्नाशय द्वारा इन रसायनों का स्राव बहिः स्रावी एवं अंतः स्रावी ग्रंथियों के प्रयोग से किया जाता है।

अग्न्याशय में उपस्थित अंतःस्रावी एवं बहिःस्रावी ग्रंथियों के कुछ महत्वपूर्ण कार्य निम्नवत हैं –

I. अग्न्याशय में अंतःस्रावी ग्रंथि के कार्य (Endocrine Function of pancreas in hindi)

अग्न्याशय में अंतःस्रावी ग्रंथियों का बेहद ही महत्वपूर्ण कार्य है यह ग्रंथियां हार्मोन का स्राव सीधे रक्त में कर देती हैं जिससे रक्त में ग्लूकोज (Glucose) या शर्करा (Sugar) का स्तर नियंत्रित रहता है एवं शरीर भलीभाँति कार्य कर पाता है।

अग्न्याशय में मौजूद यह अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ बहुत सी कोशिकाओं के समूहों से मिलकर बनती है जिन्हें हम अग्नाशय आइलेट (pancreatic islets) या लैंगरहैंस के आइलेट्स (Islets of Langerhans) कहते हैं।

इस सम्पूर्ण कोशिका समूह में मुख्य तौर पर 4 तरह की कोशिकाएं होती हैं। पहली अल्फा कोशिका दूसरी बीटा कोशिका तीसरी डेल्टा कोशिका तथा चौथी F कोशिका या पॉलीपेप्टाइड कोशिका।

(A) बीटा कोशिका (Beta Cells of Pancreas in Hindi)

अग्न्याशय की अन्तःस्रावी ग्रन्थियों में 75% उपस्थिति बीटा कोशिकाओं की पाई जाती है। जिनका कार्य रक्त में इन्सुलिन नामक हार्मोन का स्राव करना है।

हमारे शरीर में ग्लूकोज की मात्रा में हुई बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के लिए बीटा कोशिकाओं द्वारा रक्त में  “इन्सुलिन” हार्मोन का स्राव किया जाता है।

जब हमारे शरीर में ग्लूकोज की मात्रा में अत्यधिक बढ़ोतरी हो जाती है तो शरीर में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए बीटा कोशिकाओं द्वारा रक्त में  “इन्सुलिन” हार्मोन्स का स्राव किया जाता है।

इन्सुलिन का कार्य (Insulin Function of pancreas in hindi)

जब हमारे शरीर में ग्लूकोज की मात्रा में बढ़ोतरी हो जाती है तब बीटा कोशिकाओं द्वारा रक्त में “इन्सुलिन” हॉर्मोन का स्राव किया जाता है, एवं इन्सुलिन हमारे शरीर में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करता है।

शरीर में बढ़ी हुई ग्लूकोज की मात्रा को कम करने के लिए “इन्सुलिन हॉर्मोन” शरीर में मौजूद कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन एवं वसा को ग्लूकोज में बदलने से रोकता है तथा अतिरिक्त ग्लूकोज को ग्लाइकोजन के रूप में लीवर एवं अन्य मांसपेशिय कोशिकाओं में स्थानांतरित कर देता है जिस प्रकार शरीर में बढ़े हुए ग्लूकोज की मात्रा में गिरावट आती है एवं शरीर में मौजूद सम्पूर्ण ग्लूकोज की मात्रा नियंत्रित हो जाती है।

(B) एल्फा कोशिका (Alpha Cells of Pancreas in Hindi)

अग्न्याशय की अन्तःस्रावी ग्रन्थियों में लगभग 20% उपस्थिति अल्फा कोशिकाओं की पाई जाती है। जिनका कार्य रक्त में  “ग्लूकागन” नामक हार्मोन का स्राव करना है।

हमारे शरीर में आयी ग्लूकोज की मात्रा में कमी को नियंत्रित करने के लिए अल्फा कोशिकाओं द्वारा रक्त में  “ग्लूकागन” हार्मोन का स्राव किया जाता है।

ग्लूकागन का कार्य (Glucagon Function of Pancreas in hindi)

हमारे शरीर में “ग्लूकागन” हार्मोन का कार्य “इन्सुलिन” हार्मोन के ठीक विपरीत रहता है।

जब हमारे शरीर में ग्लूकोज की मात्रा में अत्यधिक कमी हो जाती है, तो एल्फा कोशिकाओं द्वारा रक्त में  “ग्लूकॉगन” हार्मोन्स का स्राव किया जाता है जिससे “ग्लूकॉगन” शरीर में मौजूद अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन एवं वसा जिन्हें इन्सुलिन द्वारा ग्लूकोज में परिवर्तित होने से रोक दिया जाता है,”ग्लूकॉगन” ऐसे पोषक तत्वों को पुनः ग्लूकोज में परिवर्तित करने की प्रक्रिया शुरू कर देता है, एवं लीवर तथा अन्य मांसपेशीय कोशिकाओं में स्थानांतरित ग्लूकोज जो कि ग्लाइकोजन के रूप में मौजूद है उसे पुनः ग्लूकोज में परिवर्तित करते हुए शरीर में ग्लूकोज की मात्रा में बढ़ोतरी के साथ साथ ग्लूकोज की मात्रा नियंत्रित करता है।

● नोट (Note): देखा जाए तो इन्सुलिन एवं ग्लूकॉगन हार्मोन एक दूसरे पर निर्भर हैं, क्योंकि यदि शरीर में इन्सुलिन की मात्रा में बढ़ोतरी के फलस्वरूप ग्लूकोज की मात्रा में कमी हो गयी तो ग्लूकॉगन हार्मोन द्वारा ग्लूकोज की मात्रा में बढ़ोतरी की जाएगी। एवं ठीक इसी के विपरीत यदि ग्लूकॉगन में बढ़ोतरी के फलस्वरूप ग्लूकोज की मात्रा में भी बढ़ोतरी होती है तो इन्सुलिन हार्मोन द्वारा ग्लूकोज की मात्रा में कमी करते हुए ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित किया जाएगा।

(C) डेल्टा कोशिका (Delta Cells of Pancreas in Hindi)

अग्न्याशय की अन्तःस्रावी ग्रन्थियों में लगभग 4% उपस्थिति डेल्टा कोशिकाओं की पाई जाती है। जिनका कार्य रक्त में सोमेटोस्टेटिन नामक हार्मोन का स्राव करना है। यह हार्मोन इंसुलिन एवं ग्लूकागन हार्मोन की मात्रा को नियंत्रित करने का काम करता है। और साथ ही साथ यह हार्मोन शरीर में स्रावित Growth (विकास) हार्मोन को भी नियंत्रित करने का कार्य करता है।

(D) F कोशिका या पॉलीपेप्टाइड कोशिका (pp कोशिका)

अग्न्याशय की अन्तःस्रावी ग्रन्थियों में मात्र 1% उपस्थिति डेल्टा कोशिकाओं की पाई जाती है। ये कोशिकाएँ पेप्टाइड हार्मोन का स्राव करती हैं। हालाँकि इनके कार्य का सही जवाब अभी तक ज्ञात नहीं है लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार इनका कार्य शरीर में ग्लूकॉगन हार्मोन की बढ़ोतरी एवं साथ ही भूख में भी बढोतरी के लिए किया जाता है।

II. अग्न्याशय में बहिःस्रावी ग्रंथि के कार्य (Exocrine Function of Pancreas in hindi)

अग्न्याशय में मौजूद बहिः स्रावी ग्रंथियां शरीर में भोजन के पाचन के लिए एंजाइमों का स्राव करने की अहम भूमिका निभाती हैं। जब भोजन पाचन के लिए छोटी आंत के पहले हिस्से “डुओडेनम” (duodenum) में प्रवेश करता है तो अग्न्याशय एक क्षारीय रस का स्राव अग्नाशय वाहिनी के जरिये छोटी आंत के पहले हिस्से “डुओडेनम” (Duodenum) में करता है, जिससे भोजन के पाचन में काफी अधिक मदद मिलती है।

आमतौर पर यह क्षारीय रस अग्नाशयी रस कहलाता है। यह रस पूर्ण रूप से पाचन संबंधित एंजाइम से मिलकर बना होता है जिन एंजाइम के कारण भोजन के पाचन में शरीर को काफी आसानी होती है। ये एंजाइम चार प्रकार के होते हैं ट्रिप्सिन (Trypsin), काइमोट्रिप्सिन (Chymotrypsin),एमिलेज (Amylase), लाइपेज (Lipase).

जिनकी कुछ संक्षिप्त जानकारी निम्नलिखित है –

(A) ट्रिप्सिन (Trypsin) एवं काइमोट्रिप्सिन (Chymotrypsin)

ट्रिप्सिन एवं काइमोट्रिप्सिन नामक एंजाइम भोजन से प्राप्त प्रोटीन एवं अमीनो अम्लों को पचाने का कार्य करते हैं, ताकि शरीर का लगातार ही विकास हो।

साथ ही ये एंजाइम हमारे शरीर को उन कीटाणुओं एवं बैक्टीरियाओं से बचाता है जो हमारी आंतो पर रह सकते हैं।

(B) एमिलेज (Amylase)

एमिलेज नामक एंजाइम भोजन में मौजूद कार्बोहाइड्रेट को मोनोसैकेराइड एवं डाइसैकेराइड (शर्करा) में तोड़ने का कार्य करता है।

एवं एमिलेज एंजाइम स्टार्च को भी तोड़कर शर्करा (ग्लूकोज) में परिवर्तित कर देता है जिससे हमारे शरीर को किसी भी कार्य को करने के लिए ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

(C) लाइपेज (Lipase)

लाइपेज आपके भोजन में मौजूद वसा को वसायुक्त अम्लों एवं ग्लिसरॉल में तोड़कर इसे पचाने का कार्य करता है।

लाइपेज एक बेहद ही जरूरी एंजाइम बन जाता है क्योंकि यदि हमारे शरीर में लाइपेज की कमी होती है तो हमारा शरीर वसा का शोषण करने में असक्षम हो जायेगा। जिससे हमारे शरीर मे वसा की कमी के साथ ही साथ शरीर में वसा में घुलनशील विटामिनों (विटामिन A, D,E एवं K) की भी कमी हो जाएगी जिससे शरीर को कई छोटे बड़े रोगों जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

अग्न्याशय से संबंधित कुछ रोग (Diseases of the Pancreas in hindi)

कई बार शरीर में आई गड़बड़ियों की वजह से हमारा अग्न्याशय सुचारू रूप से कार्य नहीं कर पाता है जिस कारण हमें बेहद ही गम्भीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

क्योंकि यदि अग्न्याशय पूर्ण मात्रा में पाचक एंजाइम का स्राव शरीर में नहीं कर पाता है तो शरीर में भोजन का पाचन भलीभाँति ना हो पाने के कारण शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी से कई प्रकार के रोग उत्पन्न हो सकते हैं।

इसी प्रकार यदि अग्न्याशय जरूरी हार्मोन जैसे इन्सुलिन आदि का स्राव ना कर पाए तो शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा में काफी अनियमितता देखने को मिलेगी जिससे भी कई गंभीर रोगों का जन्म हो जाने का खतरा बना रहता है।

अग्न्याशय से सम्बंधित कुछ रोग निम्न हैं –

● अग्न्याशयशोथ (What is Pancreatitis in hindi)

अग्नाशयशोथ नामक रोग में अग्न्याशय से निकलने वाले जठर रस (अग्नाशयी रस) का मार्ग पथरी या फिर ट्यूमर द्वारा अवरूद्ध कर दिया जाता है जिस कारण इससे निकलने वाला रस अग्नाशय में ही एकत्रित होने लगता है जो स्वयं अग्न्याशय का ही पाचन करने लगता है।

जिस कारण से अग्न्याशय में सूजन आने लगती है एवं यह स्थिति बेहद ही पीड़ादायक हो सकती है। साथ ही यह रोग “डायबटीज” को भी जन्म देने में सक्षम होता है।

आम तौर पर इस रोग का कारण शराब,ड्रग्स इत्यादि का सेवन हो सकता है।

● अग्नाशय कैंसर (Pancreatic cancer in hindi)

वर्तमान समय में अग्न्याशयिक कैंसर नामक रोग बेहद ही तेजी के साथ बढ़ रहा है, हालाँकि इसका असल कारण तो अभी पता नहीं चल पाया है लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार कई बार यह रोग मनुष्य के डीएनए में आये परिवर्तन (Mutations) के कारण होता है।

इस परिवर्तन के फलस्वरूप कई बार अग्न्याशय में मौजूद कोशिकाओं की संख्या अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती है, जिससे ये कोशिकाएँ एक जगह पर इकट्ठा होकर एक ट्यूमर का रूप ले लेती हैं, इस ट्यूमर के फलस्वरूप अग्न्याशय में मौजूद जरूरी कोशिकाएँ मरती जाती हैं, यह क्रिया लगातार ही बढ़ते जाती है एवं बढ़ते बढ़ते कैंसर का रूप ले लेती है।

इसके आलाव एक अनुमान के अनुसार अत्यधिक धूम्रपान एवं ऐल्कोहॉल का सेवन भी इस भयानक रोग का कारण हो सकते हैं। इस रोग को भयानक कहने के पीछे का सबसे बड़ा कारण यह है कि इस रोग का पता तब तक नहीं चल पाता है जब तक कि यह अपने बिगड़ते स्वरूप में ना पहुँच जाए।

इस रोग के सामान्य लक्षण पेट के ऊपरी भाग में दर्द, त्वचा का पीलापन, उल्टी एवं वजन में लगातार कमी आना आदि हैं।

अग्नाशय कैंसर के लक्षण (Pancreas Cancer Symptoms in Hindi)

अग्न्याशय से जुड़ा सबसे हानिकारक रोग जिसे अग्न्याशयी कैंसर के नाम से जाना जाता है। इसके कई तरह के लक्षण हो सकते हैं।

1. कई बार हमारे शरीर में पीलिया, अग्न्याशयी कैंसर के शुरुआती प्रभाव के कारण भी उत्पन्न हो जाता है। पीलिया रोग में त्वचा,आंखें एवं नाखून पीले पड़ जाने के साथ साथ पेट साफ होने में भी परेशानी होती है।

2. अग्न्याशय कैंसर के दौरान पेट के ऊपरी ओर बायें हिस्से में काफी अधिक असहनीय दर्द देखने को मिलता है। एवं कुछ लोगों में यह दर्द लगातार 2 या 3 दिन तक लगातार बना रहता है एवं कई लोगों में यह दर्द लगातार ही वापस आता रहता है।

3. अग्न्याशयी कैंसर के दौरान बहुत से लोगों को पीठ दर्द अर्थात कमर के निचले हिस्से में भी दर्द होता है। कई बार यह दर्द इतना तीव्र होता है मानो रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गयी हो।

4. इस रोग के दौरान भोजन के भलीभाँति ना पच पाने के कारण शरीर के वजन में अत्यधिक गिरावट भी देखने को मिलती है।

5. इस रोग के कारण व्यक्ति की भूख में अत्यधिक गिरावट देखने को मिलती है।

6. इस रोग के कारण व्यक्ति के ब्लड शुगर स्तर में आये परिवर्तन के कारण कई बार लोगों में मधुमेह (Diabetes) जैसा खतरनाक रोग भी देखने को मिलता है।

अग्न्याशय का इलाज (Pancreas Treatment in Hindi)

चिकित्सा विज्ञान आज अत्यधिक प्रगति कर चुका है, जिसके जरिये आज हर छोटे से बड़े रोगों का इलाज आज किया जा सकता है। ऐसे ही कुछ रोग हमारे शरीर के अग्न्याशय नामक ग्रन्थि अंग से जुड़े हुए हैं जिससे सम्बंधित कुछ रोग एवं उसके उपचार निम्नवत हैं –

अग्न्याशयशोथ (Pancreatitis Treatment in Hindi) – जैसा कि ऊपर बताया गया है कि इस रोग के कारण अग्नाशय में सूजन एवं इसके कारण पेट के ऊपरी हिस्से में अत्यधिक दर्द होती है।

अतः सर्वप्रथम इस दर्द को कम करने के लिए डॉक्टरों द्वारा पेन किलर का सहारा लिया जाता है रोगी को दर्द से राहत मिलने के पश्चात उसके अग्न्याशय के सूजन को कम करने के लिए डॉक्टरों द्वारा कुछ दवाइयों एवं कुछ आवश्यक तरल पदार्थों के द्वारा आपके शरीर को हाइड्रेट रखा जाता है।

पथरी या ट्यूमर के कारण अग्न्याशय रोग – कई बार अग्न्याशय में होने वाले रोगों का कारण पित्ताशय में मौजूद पथरी या फिर अग्न्याशय की कोशिका में उत्पन्न ट्यूमर होते हैं इसलिए डॉक्टरों के लिए यह जरूरी हो जाता है कि इस पथरी या इस ट्यूमर को निकाला जाए।

अग्न्याशयी कैंसर (Pancreatic Cancer Treatment in Hindi) – अग्न्याशय से जुड़ा सबसे अधिक खतरनाक रोग अग्न्याशयी कैंसर है,इस इलाज के अंतर्गत आमतौर पर अग्न्याशय में मौजूद कैंसर कारक कोशिकाओं एवं ऊतकों को कीमोथैरेपी द्वारा नष्ट किया जाता है एवं कई बार अग्न्याशय इतना बिगड़ चुका होता है कि शरीर से सम्पूर्ण अग्न्याशय को ही बदलने की जरूरत हो जाती है।

यह रोग अग्न्याशय से जुड़ा सबसे कठिन इलाज है क्योंकि इस रोग का इलाज सफल होना, बेहद ही मुश्किल माना जाता है।

अग्न्याशय के आयुर्वेदिक इलाज (Pancreas Treatment in Ayurveda in Hindi)

अग्न्याशय कैंसर – पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित वैद्य बालेंदु प्रकाश जी द्वारा इस भयावह बीमारी के लिए आयुर्वेदिक इलाज के रूप में बेहद ही सरल एवं कारगर इलाज खोजा गया है जिसमें उन्होंने तांबा,गंधक एवं पारद नामक खनिज द्रव्यों की उचित मात्रा को देवदाली एवं नींबू के रस की उचित मात्रा एवं कुछ अन्य औषधियों की आपस में क्रिया कराते हुए एक औषधि का निर्माण किया। जो इस रोग के लिए बेहद ही कारगर साबित हुई है। एवं उनके अनुसार अभी तक इस दवा के जरिये 98% मरीज पूर्ण रूप से स्वस्थ हो चुके हैं।

साथ ही आयुर्वेद के अनुसार अग्न्याशय को रोगों से मुक्त रखने, रोगी अग्न्याशय को पुनः स्वस्थ करने के लिए हमें किसी भी दवा पर निर्भर रहने से कई गुना ज्यादा अपने आहार पर ध्यान रखना चाहिए केवल उस आहार का ही प्रयोग करना चाहिए जो अग्न्याशय को रोगों से ठीक करने एवं रोग मुक्त रहने में मदद करें कुछ ऐसे ही आहार निम्नवत हैं –

अग्न्याशय को स्वस्थ करने के कुछ जरूरी आयुर्वेदिक आहार

1. अग्न्याशय को स्वस्थ रखने के लिए आप सब्जियों के तौर पर फूल गोभी,पत्ता गोभी,ब्रोकली,पालक आदि सब्जियों का प्रयोग कर सकते हैं।

2. अग्न्याशय की कोशिकाएं इस प्रकार से निर्मित होती हैं कि शरीर में पानी की कमी (डीहाइड्रेटेड) होने से अग्नाशय में सूजन हो सकती है इसलिए हमें सदैव अधिक से अधिक पानी पीकर शरीर को हाइड्रेट रखना चाहिए ताकि अग्नाशय में सूजन ना हो।

3. मूली, खीरा, टमाटर, गाजर एवं चुकंदर आदि सलाद भी अग्न्याशय को स्वस्थ एवं हाइड्रेट रखने में अत्यधिक महत्वपूर्ण आहार हैं।

4. तरबूज,स्ट्रॉबेरी,लाल अंगूर एवं पपीता आदि फल भी अग्न्याशय की कोशिकाओं की नमी बनाए रखते हैं तथा ये फल अग्न्याशय एवं लीवर के सूजन को कम करने में  भी सहायक हैं।

5. पेय पदार्थों में चाय एवं कॉफी जैसे कैफीन युक्त पदार्थों का प्रयोग ना करते हुए आपको ग्रीन टी का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व अग्न्याशय एवं लीवर के सूजन के साथ साथ इनमें मौजूद फैट को भी कम करने में सहायक है।

6. जैतून का तेल,नारियल का तेल,भाँग का तेल एवं अलसी का तेल जैसे तेल का भी उचित मात्रा में प्रयोग से अग्न्याशय के सूजन एवं स्वास्थ्य में बहुत हद तक सुधार लाया जा सकता है।

अग्न्याशय से जुड़े कुछ रोचक तथ्य (Some interesting facts about pancreas in hindi)

● अग्न्याशय अपनी खोज से कई सालों तक विज्ञान के लिए एक आश्चर्य बना हुआ था। 19वीं शताब्दी तक भी लोग अग्नाशय का कार्य नहीं जानते थे।

● अग्न्याशय के पास ऐसी कोशिकाएं भी मौजूद होती हैं जो स्वाद का अनुभव कर सकती हैं इसलिए हमारा अग्न्याशय भी शर्करा का स्वाद ले सकता है। जिसके जरिये ही अग्न्याशय हमारे रक्त में मौजूद शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखता है। लेकिन चूँकि ये कोशिकाएं हमारी जीभ में मौजूद कोशिकाओं की तरह दिमाग को स्वाद का संदेश नहीं भेज सकती हैं अतः हमें इसका अनुभव नहीं हो पाता है।

● अग्नाशयशोथ नामक रोग के दौरान जब अग्न्याशय द्वारा निष्कासित किये जाने वाले अग्नाशयी रस का मार्ग पथरी या फिर ट्यूमर द्वारा अवरुद्ध कर दिया जाता है तब यह रस अग्न्याशय में ही एकत्रित हो जाता है जिस कारण अग्न्याशय स्वयं के ही पाचन की क्रिया शुरू कर देता है।

●चूंकि किसी रोग के अलावा सामान्य अवस्था में भी अग्न्याशय द्वारा प्रदान किये जाने वाले पाचन रस (अग्नाशयी रस) के लिए बहुत अधिक संभावना होती हैं कि ये रस स्वयं अग्न्याशय को ही पचा ले। इसलिये इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई बार अग्नाशय द्वारा इन एंजाइम के विरुद्ध कार्य करने वाले (एंटी) एंजाइम का स्राव किया जाता है। जो अग्न्याशय के पाचन को रोकते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

हमने इस लेख “अग्न्याशय रोग एवं उपचार Pancreas in Hindi” के माध्यम से आपको अग्न्याशय के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देने की कोशिश की है आशा है कि यह लेख आपको कुछ नई जानकारियों को जानने के लिए सहायक रहा होगा।

लेकिन फिर भी यदि आपके मन में कोई सवाल या सुझाव रह गया हो तो हमें Comment करके जरूर बताएं हमें आपकी सहायता करके अत्यधिक खुशी होगी।

और साथ ही इस लेख एवं जानकारी को अपने दोस्तों से अवगत कराने के लिए जरूर ही इसे शेयर करें। About Pancreas in Hindi.

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