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मंगल ग्रह का परिचय (Introduction to Planet Mars in hindi)

ब्रह्मांड को जानने के इस सफर में आज हम आ पहुँचे हैं पृथ्वी के एक और पड़ोसी ग्रह पर जिसका नाम है मंगल ग्रह (Planet Mars in hindi)। मंगल हमारे सौरमण्डल का दूसरा सबसे छोटा ग्रह है एवं सूर्य से चौथे क्रम का ग्रह है।

Planet Mars in Hindi
Mars

विज्ञान के क्षेत्र पर सक्रिय रहने वाले लोग अक्सर मंगल के बारे में कुछ न कुछ नई खबरें अवश्य सुनते रहते हैं, एवं इन खबरों के फलस्वरूप जिज्ञासा उतपन्न होती है तथा अनेकों सवाल उतपन्न होते हैं, जिनमें से बहुत से सवालों का जवाब मिलना कठिन हो जाता है।

इसलिए हम मंगल ग्रह पर यह लेख लाये हैं जिससे आपको आपके सभी सरल एवं विचित्र सवालों के जवाब सरलता से समझ आ जाएं तो चलिए शुरू करते हैं इस लेख को

मंगल ग्रह का निर्माण एवं संरचना (Formation and structure of Planet Mars in hindi)

सौरमण्डल के अन्य 4 स्थलीय ग्रहों (terrestrial planets) की ही तरह मंगल का निर्माण भी आज से 4.5 अरब साल पहले प्रबल  गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा आस पास मौजूद गैस एवं धूल को आपस में मिला देने से हुआ।

solar system in its early phase
solar system in its early phase

मंगल ग्रह की आंतरिक संरचना पर ध्यान दिया जाए तो पता चलता है कि मंगल ग्रह तीन परतों में बंटा हुआ है। जिसमें सबसे भीतरी परत कोर, उससे बाहरी परत मेंटलएवं सबसे बाहरी परत क्रस्ट कहलाती है।

हालाँकि अभी भी हम सटीकता से मंगल की आंतरिक संरचना का पता नहीं लगा पाए हैं, लेकिन वैज्ञानिकों के कई प्रयोगों के अनुसार मंगल के कोर की त्रिज्या करीबन 1810 से 1860 किमी. है एवं यह कोर आयरन, निकिल एवं सल्फर से बना ही सकता है साथ ही मंगल ग्रह का कोर या तो गलित अवस्था में हो सकता है या फिर मंगल का एक बाहरी कोर हो सकता है जो कि गलित अवस्था में होगा।

Core of mars
Core Of Mars, Image Credit- seis-insight.eu

कोर से बाहरी परत रॉकी मेंटल है जिसकी मोटाई 1240 से 1880 किमी. है। यह रॉकी मेंटल मुख्य रूप से आयरन, मैग्नीशियम एवं सिलिकॉन से मिलकर बना है। कई प्रयोगों के अनुसार मंगल के मेंटल में मौजूद आयरन की मात्रा पृथ्वी के मेंटल में मौजूद आयरन की मात्रा की दोगुनी है।

सबसे बाहरी परत यानी कि क्रस्ट की मोटाई मोटाई 10 से 50 किमी. की बीच है। मंगल का यह क्रस्ट मुख्य रूप से आयरन, मैग्नीशियम, पोटेशियम, कैल्शियम ऐलुमिनियम आदि से मिलकर बना है।

मंगल ग्रह की कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ (Information of Mars Planet in hindi)

मंगल की सूर्य से दूरी227,943,824 किमी.
मंगल द्वारा सूर्य की परिक्रमा में लिया जाने वाला समय(1 वर्ष)686.98 पृथ्वी दिन
मंगल ग्रह का घूर्णन (1 दिन)24 घंटे 39 मिनट 36 सेकंड
मंगल ग्रह की त्रिज्या3,389.5 किमी.
क्षेत्रफल1.44×108 किमी.2
द्रव्यमान6.417×1023  किग्रा.
घनत्व3.93 ग्राम/सेमी.3
सतह का गुरुत्वाकर्षण3.711 मी./सेकंड2
पलायन वेग5.03 किमी./सेकंड
ज्ञात प्राकृतिक उपग्रह2

मंगल ग्रह की सतह (Surface of Planet Mars in hindi)

मंगल की सतह कई तरह के खनिजों,धातुओं एवं विभिन्न तत्वों से निर्मित है, जैसे –  मैग्नीशियम, सोडियम, पोटैशियम, क्लोरीन सिलिकॉन आदि।

मंगल की सतह पर उल्कापिंडों की टक्कर के फलस्वरूप बहुत ही अधिक मात्रा में गड्ढ़े मौजूद हैं। नासा के एक आंकड़े के अनुसार मंगल पर इन गड्ढ़ों की कुल संख्या 43000 तक हो सकती है जबकि इनका व्यास 5 किमी. से भी अधिक हो सकता है। मंगल पर धूमकेतुओं की इतनी अधिक टक्करों के पीछे का कारण कहीं न कहीं उसकी एस्टरॉयड बेल्ट के नजदीक मौजूदगी भी है।

Surface of mars
Surface of Mars; Image Credit- NASA

मंगल की सतह पर बेहद ही विशाल घाटी की प्रणाली है, जिसे वैलेस मेरिनरिस (Valles Marineris) नाम से जाना जाता है। यह प्रणाली करीब 4000 किमी. लम्बी, 200 किमी. चौड़ी एवं 7 किमी. गहरी है। जो कि सौरमण्डल की अभी तक ज्ञात सबसे बड़ी घाटियाँ हैं।

वर्तमान में मंगल की सतह पर कोई भी ज्वालामुखी सक्रिय अवस्था में मौजूद नहीं है,परन्तु इन निष्क्रिय ज्वालामुखी की संरचनाऐं बेहद ही बड़ी संख्या में उपस्थित हैं। इन्हीं में से एक ज्वालामुखी ओलंपस मॉन्स (Olympus Mons) है। जो कि पृथ्वी पर मौजूद सबसे बड़े पर्वत माउंट एवरेस्ट से तीन गुना लम्बा है।

चूँकि मंगल की सतह पर मौजूद अनेकों चट्टानें आयरन से भरपूर हैं, अतः जब यह आयरन बाहरी वातावरण एवं गैसों के सम्पर्क में आता है तो इस स्थिति में यह चट्टानें संक्षारित हो जाती हैं। जिस कारण से इस मिट्टी का रंग लाल या हल्का भूरा हो जाता है एवं जब यह धूल वायुमण्डल में पहुंचती है तो यह ग्रह को लाल रंग देती है।

हालाँकि मंगल ग्रह पर पानी की मौजूदगी की पुष्टि हो चुकी है लेकिन मंगल के बेहद ही पतले वायुमण्डल के कारण इस पर मौजूद जल की मात्रा बेहद ही कम है एवं सम्पूर्ण जल बर्फ के रूप में उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद है। जिसका कारण ध्रुवों पर सूर्य की मौजूदगी का बेहद ही कम होना है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस ध्रुवीय बर्फ के नीचे नमकीन जल उपस्थित है, अतः इससे यह माना जाता है कि बहुत समय पहले मंगल पर समुद्रों की मौजूदगी थी।

सूर्य की उपस्थिति में मंगल की सतह का तापमान करीब 20℃ होता है वहीं सूर्य की अनुपस्थिति में यह तापमान गिरकर -153℃ के करीब पहुँच जाता है। इसके अलावा ध्रुवों में सूर्य की बेहद ही कम की रोशनी पड़ने के कारण ध्रुवों का तापमान सामान्य सतही तापमान से भी नीचे गिर जाता है।

मंगल ग्रह का घूर्णन एवं परिक्रमा (Rotation and Revolution of Planet Mars in hindi)

मंगल ग्रह को अपने अक्ष पर एक घूर्णन पूरा करने में 24.6 घण्टे 37 मिनट का समय लगता है। यानी कि मंगल का एक दिन 24 घण्टे 37 मिनट का होता है, जो पृथ्वी के एक दिन (23 घण्टे 56 मिनट) से बहुत मेल खाता है।

मंगल ग्रह अपने अक्ष पर 25.19° (25.19 डिग्री) झुका हुआ है जो पुनः पृथ्वी के 23.4° के झुकाव से बहुत अधिक मेल खाता है। इसलिए मंगल पर भी मौसम का बदलाव पृथ्वी की ही तरह होता है लेकिन क्योंकि मंगल पर एक वर्ष 669.9 पृथ्वी दिन का होता है इस कारण से मंगल पर किसी एक विशेष मौसम की अवधि पृथ्वी से अधिक होती है।

Rotation of planets

मंगल द्वारा किया जाने वाला घूर्णन एवं सूर्य के चारों ओर परिकल्पना पृथ्वी के ही अनुरूप हैं अतः इसको समझने में हमें कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए क्योंकि हम पृथ्वी की इन गतियों के बारे में अच्छे से जानते हैं।

मंगल ग्रह की कक्षा (Orbit of Planet Mars in hindi)

मंगल सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्ताकार कक्षा में परिक्रमा करता है, एवं इसे एक चक्कर पूर्ण करने में 669.9 पृथ्वी दिन का समय लगता है। अब चूँकि मंगल का परिक्रमण पथ पृथ्वी के परिक्रमण पथ के मुकाबले बहुत अधिक दीर्घवृत्ताकार है जिस कारण से मंगल के विभिन्न हिस्सों पर मौसमों के शुरू एवं खत्म होने की अवधि पृथ्वी के अनुसार नियत ना होकर बहुत अधिक विभिन्न है।

Orbit of Mars
Orbit of Mars and Earth; Credit- NASA

जिसका कारण मंगल के दीर्घवृत्ताकार कक्षा के दौरान मंगल के सूर्य समीपक बिंदु (perihelion) एवं सूर्य दूरक बिंदु (aphelion) के बीच मौजूद दूरी का बहुत ही ज्यादा अधिक होना है जिस कारण से मंगल के कुछ स्थानों पर मौसम अन्य स्थानों के मुकाबले अधिक या कम दिनों तक ठहरता है।

मंगल ग्रह का वायुमण्डल (Atmosphere of Planet Mars in hindi)

मंगल ग्रह का वायुमण्डल बेहद ही अधिक पतला है  जो कि विभिन्न गैसों से मिलकर बना है। जिनमें 95% मौजूदगी कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की, 2.6% नाइट्रोजन (N2) की, 1.9% ऑर्गन (Ar) की, 0.16% ऑक्सीजन (O2) की एवं 0.06% मौजूदगी कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) की है।

मंगल का वायुदाब 0.088 psi (pounds per square inch) है, जो कि बेहद ही कम है यहाँ तक कि मंगल का वायुदाब पृथ्वी के वायुदाब (14.696 psi) के 1% से भी कम है।

चूँकि मंगल का वायुमण्डल बेहद ही पतला है अतः यह मंगल पर प्रवेश करने वाले अधिकतम धूमकेतुओं को नहीं रोक पाता है व ये धूमकेतु मंगल की सतह से जा टकराते हैं। जिस कारण से मंगल की सतह पर बड़े बड़े गड्ढे मौजूद हैं। हालाँकि मंगल का वायुमण्डल शुरुआत से ही ऐसा नहीं था। बल्कि वैज्ञानिकों के अनुसार शुरुआत में मंगल का वायुमण्डल काफी मोटा रहा हो सकता है।

इसके अलावा मंगल ग्रह पर अक्सर हवाएँ इतनी तेज़ हो जाती हैं कि ये धूल भरी आँधियाँ पैदा कर देती हैं जो ग्रह के अधिकांश हिस्सों तक पहुँच जाती हैं। एवं कई बार ये आंधियाँ इतनी विशाल हो जाती हैं कि कई बार पृथ्वी से दूरदर्शी के माध्यम से भी इनका निरीक्षण किया गया है।

वैज्ञानिकों द्वारा मंगल के वायुमंडल पर मीथेन के होने का भी अनुमान था जिसकी पुष्टि के लिए बहुत समय से शोध किये जा रहे थे, तभी नासा के क्यूरियोसिटी (Curiosity) रोवर द्वारा बहुत ही सूक्ष्म मात्रा में लेकिन मीथेन के होने की पुष्टि की।

अब चूँकि मीथेन कार्बनिक पदार्थों के टूटने या क्षय से उत्पन्न होती है जिसमें सूक्ष्मजीवों (Microbes) की सबसे बड़ी भूमिका होती है, इस एक खोज से वैज्ञानिक यह अनुमान लगा रहे हैं कि हो सकता है कि मंगल पर किसी प्रकार का जीवन मौजूद हो।

हालाँकि आज भी मंगल ग्रह पर इस मीथेन की मौजूदगी के बारे में वैज्ञानिक कुछ नहीं जान पाए हैं कि ये कहाँ से आई।

मंगल ग्रह का चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field of Planet Mars in hindi)

करीबन 4.2 अरब साल पहले तक मंगल ग्रह पर चुम्बकीय क्षेत्र उपस्थित था। परन्तु कुछ अज्ञात कारणों के चलते मंगल का यह मजबूत चुम्बकीय क्षेत्र धीरे धीरे खत्म हो गया एवं इस ग्रह पर बेहद ही कमजोर चुम्बकीय क्षेत्र बच गया।

2018 से पहले वैज्ञानिक यह मानते थे कि मंगल ग्रह पर बेहद ही कमजोर चुम्बकीय क्षेत्र है जिसे नगण्य माना जा सकता है लेकिन नवम्बर 2018 में मंगल की सतह पर उतरे लैंडर insight द्वारा यह बताया गया कि उस लैंडर के लेंडिंग की जगह पर मौजूद चुम्बकीय क्षेत्र वैज्ञानिकों की पुरानी जाँचों से 10 गुना अधिक शक्तिशाली है। Planet Mars in Hindi

परन्तु यह चुम्बकीय क्षेत्र पूरे ग्रह पर ना एकसमान न होते हुए ग्रह के एक छोटे से हिस्से पर ही फैला है। जिसकी ऐसी विचित्र स्थिति का असल कारण आज भी वैज्ञानिकों के लिए पहेली बना हुआ है।

मंगल ग्रह पर जीवन (Life on Planet Mars in hindi)

वैज्ञानिकों के अनुसार जब मंगल ग्रह का वायुमण्डल आज के मुकाबले कई अधिक मोटा, तथा मंगल पर समुद्र उपस्थित थे तब मंगल ग्रह पर जीवन का होना सम्भव था। परन्तु वैज्ञानिकों के अनुसार मंगल की वर्तमान स्थिति के अनुकूल मंगल पर कोई भी जीवन मिल पाना मुश्किल है।

लेकिन भविष्य में सदी के महानायक एलोन मस्क (Elon Musk) अपनी कम्पनी SpeceX के जरिये मंगल पर इंसानी बस्तियों को स्थापित करने की तैयारियाँ कर रहें हैं। ताकि इंसानी सभ्यता को अंतरग्रहीय सभ्यता (interplanetary civilization) बनाया जाए।

Mars City
Mars City; Image by- SpaceX

इलोन मस्क कहते हैं की 2030 तक वो पूर्ण रूप से मंगल ग्रह पर एक इंसानी सहर स्थापित कर देंगे तथा इसकी शुरुवात वो 2024 में मंगल ग्रह पर पहली बार इंसानों को भेजकर करने वाले हैं।

मंगल ग्रह के उपग्रह (Natural Satellites of Planet Mars in hindi)

मंगल ग्रह के दो काफी छोटे उपग्रह हैं, जो कि क्षुद्रग्रहों (asteroids) से बहुत अधिक मेल खाते हैं। साथ ही इन दोनों उपग्रहों पर काफी अधिक गड्ढे मौजूद हैं, जो किसी पुराने समय की टक्करों का प्रमाण हैं।

(I) फोबोस (Phobos) – फोबोस मंगल के दोनों उपग्रहों में से बड़ा उपग्रह है जिसका व्यास करीब 22.534 किमी. है। इसको मंगल का एक चक्कर पूर्ण करने में कुल 8 घण्टों का समय लेते हैं।

(II) डीमोस (Deimos) – डीमोस हमारे सौरमण्डल का सबसे छोटा उपग्रह है, जिसका व्यास करीब 13 किमी. है। मंगल का एक चक्कर पूर्ण करने में इसे 30.3 घण्टों का समय लगता है।

phobos_deimos
Moons of Mars Image Credit- astronomytrek.com

मंगल ग्रह पर मिशन (Missions on Planet Mars in hindi)

लगातार 6 मिशनों की असफलता के बाद पहली बार  28 नवम्बर 1964 को नासा द्वारा भेजे गए स्पेसक्राफ्ट मेरिनर-4 (Mariner 4) को मंगल पर किये गए पहले सफल मिशन के तौर पर पहचान मिली।

इसके पश्चात वर्तमान तक मंगल एवं उसके उपग्रहों पर कुल 76 सपेस्क्राफ्ट भेजे जा चुके हैं जिनमें से कुल 25 स्पेसक्राफ्ट सफल हुए 2 स्पेसक्राफ्ट आंशिक रूप से सफल हुए ,35 स्पेसक्राफ्ट असफल हुए तथा 14 स्पेसक्राफ्ट आज भी ऑपरेशनल हैं।

साथ ही मंगल ग्रह की सतह पर भी आज तक बहुत से स्पेसक्राफ्ट तथा रोवर लैंड कर चुके हैं जिसमें मार्स-3 (Mars 3) स्पेसक्राफ्ट 28 मई 1971 को सोवियत संघ द्वारा भेजा गया था जो सर्वप्रथम मंगल पर सफलतापूर्वक लैंडिंग करने में तो सफल रहा परन्तु इसकी लैंडिंग के 110 सैकंड बाद इससे सम्पर्क टूट गया। अतः इस मिशन को आंशिक रूप से सफल माना जाता है।

सोवियत संघ के अन्य कुछ असफल मिशनों के पश्चात 20 अगस्त 1975 को नासा द्वारा भेजे गए वाइकिंग 1 (Viking 1) स्पेसक्राफ्ट द्वारा मंगल पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की गई तथा नासा ने इसके साथ सफलतापूर्वक सम्पर्क भी स्थापित किया किया।

ऐसे ही बहुत से सफल मिशनों के पश्चात प्रगतिशील विज्ञान के सहारे से 18 फरवरी 2021 को नासा के मार्स 2020 (Mars 2020) मिशन के तहत परसिवरेंस (Perseverance) नामक रोवर तथा इंजिन्युइटी (Ingenuity) नामक हैलिकॉप्टर मंगल की सतह पर सफलतापूर्वक पहुँचे।

पृथ्वी पर 1.8 किग्रा. भार (मंगल पर – 680 ग्राम) वाले इस हैलीकॉप्टर इंजिन्युइटी (Ingenuity) द्वारा मंगल के उन ऊँचाई वाले इलाकों की जांच की जाएगी जहाँ तक किसी भी रोवर का पहुँच माना बेहद ही मुश्किल है।

Mars Rover and Helicopter
Mars Rover and Helicopter; Credit- NASA

इसके अलावा 2021 में मंगल की सतह पर सफलतापूर्वक रोवर उतारने वाला चीन दूसरा देश बन गया है।

साथ ही भारत द्वारा भी मंगल ग्रह पर सफलतापूर्वक एक मिशन किया जा चुका है जिसका नाम मंगलयान रखा गया था। जिससे आप भलीभाँति वाकिफ होंगे। एवं भविष्य में भारत मंगल पर अन्य मिशन करने की योजना पर जुटा हुआ है।

मंगल ग्रह के रोचक तथ्य (Interesting facts of Planet Mars in hindi)

1. रोमन साम्राज्य के युद्ध के देवता के नाम पर इसका नाम Mars रखा गया। इसके अलावा इस ग्रह को आयरन ऑक्साइड की मौजूदगी के कारण आज रेड प्लैनेट के नाम से भी जाना जाते है।

2. पृथ्वी के मुकाबले मंगल का गुरुत्वाकर्षण बल बेहद ही कमजोर है, एक आँकड़े के अनुसार मंगल का गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल का सिर्फ 37% ही है। इसलिए आप मंगल की सतह पर पृथ्वी की सतह से तीन गुना ऊँची छलांग मार सकते हैं।

3. वर्तमान में मंगल ग्रह की सतह पर कुल तीन रोवर नासा का क्यूरियोसिटी (Curiosity), चीन का तियानवेन (Tianwen) एवं नासा का ही परसिवरेंस (Perseverance) सक्रिय अवस्था में हैं।

4. मंगल ग्रह का परिक्रमण पथ सौरमण्डल के सभी 8 ग्रहों में से सबसे अधिक दीर्घवृत्ताकार है।

5. मंगल ग्रह के कुछ अंश पृथ्वी पर भी पाए गए हैं, क्योंकि कुछ समय पहले से मंगल के साथ अनेकों क्षुद्रग्रहों कि टक्कर के पश्चात मंगल का मलबा पृथ्वी पर भी उल्कापिंडों के रूप में गिरता रहा है।

Why mars is called red planet in hindi ?

मंगल की सतह पर मौजूद चट्टानें आयरन/लोहे से भरपूर हैं, जब यह आयरन मगल ग्रह के वायुमंडल में मौजूद गैसों के सम्पर्क में आता है तो यह संक्षारित हो जाता हैं। जिस कारण से मंगल ग्रह पर चट्टानों व मिट्टी का रंग लाल एवं हल्का भूरा हो जाता है। और मंगल ग्रह लाल दिखाई पड़ता है इसलिए मंगल ग्रह को लाल ग्रह भी कहते हैं।

Conclusion

आशा है कि इस लेख को पढ़ने के बाद आपके मस्तिष्क में मंगल (Planet Mars in hindi) से सम्बंधित सभी प्रश्नों के उचित जवाब आपको मिल गए होंगे।

लेकिन यदि इस लेख को पढ़ने के बाद भी अगर आपका कोई सवाल या सुझाव रह गया हो तो हमें comment section में जरूर बताएं, हमें आपके सवालों का जवाब देते हुए आपकी सहायता करके बेहद ही खुशी होगी।

साथ ही इस लेख को अधिक से अधिक लोगों तक शेयर करें ताकि अन्य लोगों तक भी यह अहम जानकारियां पहुँच सकें।

धन्यवाद।

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