If you think you understand quantum mechanics, then you don’t understand quantum mechanics.

Richard Feynman

क्वांटम भौतिकी का परिचय (Introduction to quantum physics in hindi)

भौतिक विज्ञान(Physics) इस ब्रह्माण्ड(Universe) के व्यवहार को Explain(व्याख्या/समझाने) करने में काफी हद तक सफल रहा है। हम बड़ी आसानी से यह Predict(भविष्यवाणी) कर सकते हैं कि कब कौन सा तारा एवं कौन सा ग्रह किस समय कहां पर होगा।

हम सालों पहले ये Predict कर सकते हैं कि सूर्य ग्रहण एवं चन्द्र ग्रहण कब होगा। और Physics का जो हिस्सा इन सब चीजों को Explain करता है उसे हम कहते हैं Classical Physics.

लेकिन यह Classical Physics बहुत छोटे स्तर(Level) पर कणों(Particles) के व्यवहार एवं उनके गुणों को Explain करने में पूर्ण रूप से असफल हो जाता है।

Sub-atomic particles(परमाणु से भी छोटे कण) जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन के Behavior(व्यवहार) को, इनकी गति को एवं इनके गुणों Classical Physics बिल्कुल भी Explain नहीं कर सकता है। और यहीं पर शुरुवात होती है क्वांटम भौतिकी(Quantum Physics) की।

पूरी की पूरी क्वांटम भौतिकी(Quantum Physics in Hindi) को सिर्फ एक ही आर्टिकल में Explain कर पाना तो असंभव है। इसलिए आज हम इस आर्टिकल में बात करेंगे क्वांटम भौतिकी(Quantum Physics) के basics के बारे में और जानेंगे की आखिर Quantum Mechanics क्या है।

और साथ ही जानेंगे Quantum Mechanics के जन्म से लेकर इसके Physics की नई शाखा बनने की भौतिक वैज्ञानिकों(Physicist) के विरोधाभासों से भरी हुई बड़ी ही दिलचस्प और रोमांचक Story.

इस आर्टिकल को पड़ने के बाद Quantum Mechanics में जो आगे आने वाली चीजें हैं, Concepts एवं Equations हैं उनका मतलब आपको आसानी से समझ आएगा।

अगर यदि आप Physics में इंटरेस्ट रखते हैं और Physics के शौकीन हैं तो यह आर्टिकल आपके लिए Quantum Physics के Introduction एवं इसके Basics को समझने के लिए Perfect होगा।

Note: Quantum Physics तथा Quantum Mechanics दोनों शब्दों का मतलब एक ही होता है।

क्वांटम भौतिकी की शुरुवात (Birth of Quantum Physics in Hindi)

Physicists(भौतिक वैज्ञानिको) के अनुसार Quantum Physics की शुरुवात सन 1905 में मैक्स प्लांक की उस Theory सिद्धांत से हुई जिसमें वे Black Body Radiation को Explain करने की कोशिश कर रहे थे।

Black-body radiation(कृष्णिका विकिरण)- क्वांटम भौतिकी का जन्म

Quantum Physics की शुरुवात होती है Physicist मैक्स प्लांक के उस सिद्धांत/Theory से जिसमे वो कृष्णिका विकिरण(Black Body Radiation) को Explain करने के लिए प्रकाश(Electromagnetic Radiation) के कण/Particle व्यवहार के बारे बताने की कोशिश कर रहे थे।

इस Theory में वे प्रकाश (जो की एक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन है) उसके कण व्यवहार के बारे में बात कर रहे थे।

इस सिद्धांत में उन्होंने एक नया सार्वभौमिक स्थिरांक(Universal Constant) दिया जिसे प्लांक स्थिरांक के नाम से जाना जाता है, एवं इसे h से दर्शाया जाता है।

इस Constant का मान 6.62607015 × 10−34 joule second होता है।

इस Constant की सहायता से मैक्स प्लांक Black Body Radiation को पूरी तरह Explain करने में सफल रहे जो कि भौतिक वैज्ञानिकों के लिए कई सालों तक एक बहुत बड़ी अनसुलझी पहेली के रूप में बना हुआ था।

यह Constant आगे जाकर Quantum Physics का इतना महत्वपूर्ण स्थिरांक बना की आगे आपको Quantum Physics में लगभग हर जगह पर यह दिखेगा।

आइंस्टीन द्वारा प्रकाश विध्युत प्रभाव की सफल व्याख्या (Einstein’s Explanation of photoelectric effect in Hindi)

आगे चलकर सन 1905 में आइंस्टीन ने प्रकाश विध्युत प्रभाव(Photoelectric  effect) को समझाने के लिए भी इसी Constant का प्रयोग किया और वे इस Constant की सहायता से प्रकाश विध्युत प्रभाव को समझने में सफल भी हुए।

Photoelectric effect को Explain करते हुए उन्होंने ये कहा कि प्रकाश (Electromagnetic wave / विध्युतचुंबकीय तरंग) तरंग नहीं बल्कि यह छोटे छोटे ऊर्जा के पैकेटों (ऊर्जा के कणों) का बना होता है, उन्होंने प्रकाश के इन ऊर्जा के पैकेटों को फोटोन कहा।

उन्होंने बताया की प्रकाश फोटोन के रूप में चलता है जो कि ऊर्जा के छोटे छोटे कण या पैकेट की तरह व्यवहार करते हैं। आइंस्टीन के अनुसार प्रत्येक फोटोन की ऊर्जा h×f होती है। यहां h प्लांक स्थिरांक है और f प्रकाश की आवृत्ति है।

प्रकाश विद्युत प्रभाव
प्रकाश विद्युत प्रभाव

आइंस्टीन ने अपने इस सिद्धांत में प्लांक स्थिरांक h का प्रयोग करके प्रकाश विध्युत प्रभाव को पूर्ण रूप Explain कर दिया। इसके बाद से Physics की दुनिया में प्लांक स्थिरांक h का महत्व बढ़ गया।

प्रकाश विद्युत प्रभाव के बारे में पूर्ण रूप से यहाँ पढ़ें 

चूंकि आइंस्टीन Theory of relativity सापेक्षता के सिद्धांत पर भी काम कर रहे थे तो उन्होंने सापेक्षता के सिद्धांत में आने वाली एक समीकरण जो कि किसी गति कर रहे कण(Particle) की कुल ऊर्जा को उसके संवेग और उसकी Rest Mass Energy के साथ संबंधित करती है ((E2 = (mc2)2 + (pc)2)).

फोटोन का संवेग
फोटोन का संवेग

इस समीकरण प्रयोग करके उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि प्रकाश के कण जिन्हें उन्होंने फोटोन कहा था उनका संवेग भी होता है इससे यह स्पष्ट हो गया था कि प्रकाश कण एवं तरंग दोनों की तरह व्यवहार करता है।

और उनके द्वारा दिया गया फोटोन के संवेग का सूत्र कुछ इस प्रकार है P=h/λ (Where p is momentum and λ is wavelength of light)

अगर आप भौतिक विज्ञान के छात्र नहीं हैं या आप गणितीय समीकरणों को ढंग नहीं समझ पाते हैं या फिर अभी छोटी कक्षाओं में पढ़ते हैं तो आप सिर्फ इतना समझिए की आइंस्टीन ने अपने प्रकाश विध्युत प्रभाव के explanation में अपने सापेक्षता के सिद्धांत का प्रयोग करके यह सिद्ध कर दिया कि प्रकाश कण की तरह भी व्यवहार करता है, जिन्हे फोटोन कहते हैं। और इन फोटनो का द्रव्यमान (Rest Mass) शून्य होता है जबकि इनका संवेग P का मान प्रकाश की तरंगदैर्ध्य λ पर निर्भर करता है।

यहां तक यह तो स्पष्ट हो चुका था कि प्रकाश दोहरी प्रकृति प्रदर्शित करता है यानी की कुछ परीक्षणों में यह कण की तरह व्यवहार करता है जबकि अन्य कुछ परीक्षणों में यह तरंग की तरह व्यवहार करता है।

जिस प्रकाश को आज तक हम तरंग समझते आए थे वह कण भी है और तरंग भी यानी की प्रकाश दोहरी प्रकृति प्रदर्शित करता है।

प्रकाश की दोहरी प्रकृति
प्रकाश की दोहरी प्रकृति

द्रव्य की द्वैत प्रकृति (Dual nature hypothesis of Louis de Broglie)

इन सब के बाद प्रकाश (Electromagnetic wave) की दोहरी प्रकृति से प्रेरणा लेकर सन 1924 में लुइस डी ब्रोग्ली(Louis de Broglie) ने अपनी Ph.D. thesis में एक hypothesis दिया।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रकाश को आज तक हम तरंग मानते हुए आए थे वह दोहरी प्रकृति प्रदर्शित करता है यानी की कण एवं तरंग दोनों की तरह व्यवहार करता है, एवं उसका कुछ संवेग होता है ठीक उसी प्रकार सभी प्रकार के कण भी गति करते हुए तरंग की तरह भी जरूर व्यवहार करते होंगे और इस तरंग की कोई ना कोई तरंगदैर्ध्य(λ) अवश्य होगी।

De Broglie ने आइंस्टीन द्वारा दिए गए फोटोन के संवेग वाले समीकरण को सीधे कण में Apply करके कण द्वारा प्रदर्शित तरंग की तरंगदैर्ध्य(λ) की गणना के लिए समीकरण दे दिया।

जिसके अनुसार अगर कोई भी कण v वेग से गति करता है और उसका संवेग P है तो उसका संवेग भी p = h/λ होगा तो उस कण के द्वारा प्रदर्शित तरंगदैर्ध्य λ=h/P होगी।

द्रव्य की द्वैत प्रकृति की पुष्टि (Confirmation of Dual Nature of Particles- progress of quantum physics in Hindi)

डेविसन जर्मर प्रयोग (Davisson–Germer experiment)

इसी दौरान (1923 से 1927 तक) दो वैज्ञानिक एक Experiment(प्रयोग) कर रहे थे जिसमे वो निकल-धातु (Nickel-Metal) के क्रिस्टल(Crystal) पर उच्च ऊर्जा की इलेक्ट्रॉन बीम गिरा कर निकल Crystal के Structure(संरचना) का अध्ययन करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन इस Experiment में हुई ग़लतियों के कारण इसका निष्कर्ष कुछ और ही निकल गया।

इस Experiment के दौरान उन्होंने पाया कि इलेक्ट्रॉनों का व्यतिकरण हो रहा था। लेकिन यह कैसे संभव था, इलेक्ट्रॉन तो एक कण है जबकि व्यतिकरण की घटना सिर्फ तरंगों में पाई जाती है।

तो इस Experiment में वैज्ञानिकों ने देखा कि जिस प्रकार प्रकाश कण की तरह भी व्यवहार करता है ठीक उसी प्रकार इलेक्ट्रॉन जिन्हें की आज तक हम सिर्फ कण मानते हुए आए थे वे इलेक्ट्रॉन भी तरंग की तरह व्यवहार कर रहें हैं और व्यतिकरण की घटना प्रदर्शित करते हैं।

जब इस Experiment की सहायता से इलेक्ट्रॉनों द्वारा प्रदर्शित तरंग की तरंगदैर्ध्य की गणना की गई तो यह de Broglie के सिद्धांत द्वारा दिए गए समीकरण के साथ सामंजस्य स्थापित करती हुई पाई गई और de Broglie सिद्धांत की पुष्टि हो गई।

कण particles के द्वारा प्रदर्शित तरंग को द्रव्य तरंग(Matter wave) नाम दिया गया। इसके बाद आगे चलकर प्रोटॉन, न्यूट्रॉन, एल्फा कण तथा कार्बन नाभिक जैसे कणों को लेकर भी इनकी तरंग प्रकृति को जाँचने के लिए विभिन्न प्रकार के अनेकों एक्सपेरिमेंट्स किए गए (ऐसे एक्सपेरिमेंट्स जो सिर्फ तरंग द्वारा प्रदर्शित किए जाते हैं जैसे व्यतीकरण, विवर्तन तथा द्वि-रेखाछिद्र प्रयोग/double slit experiments आदि) और इन सब experiments में द्रव्य की दोहरी प्रकृति को तथा De Broglie के सिद्धांत को सही पाया गया।

द्वि-रेखाछिद्र प्रयोग
द्वि-रेखाछिद्र प्रयोग

इस प्रकार कणों की दोहरी प्रकृति(द्रव्य तथा तरंग) सिद्ध होने के कारण Quantum Physics भौतिक विज्ञान की एक नई शाखा के रूप में उभरने लगा गई थी।

द्वि-रेखाछिद्र प्रयोग-2
द्वि-रेखाछिद्र प्रयोग-2

मुख्य रूप से Fundamental एवं Subatomic सूक्ष्म कण जिनका द्रव्यमान तुलनात्मक रूप से बहुत कम होता है पूर्ण रूप से तरंग प्रकृति प्रदर्शित करते हैं। जबकि वे कण जिनका द्रव्यमान तुलनात्मक रूप से अधिक होता है और जिनका हम रोज़मर्रा की दुनिया में प्रयोग करते हैं वे पदार्थ अधिक द्रव्यमान होने के कारण तरंग प्रकृति को प्रदर्शित नहीं करते हैं या करते भी है तो उनकी तरंगदैर्ध्य नगण्य होती है।

द्रव्य की द्वैत प्रकृति
द्रव्य की द्वैत प्रकृति

लेकिन फिर de Broglie सिद्धांत के साथ एक problem पैदा हो गई, problem यह थी कि गति करते हुए कण द्वारा प्रदर्शित तरंग चाल उस कण के चाल की आधी थी।

बाद में Physicists को पता चला कि जो द्रव्य तरंग होती है वह बहुत सारी अलग अलग तरंगदैरध्य वाली तरंगों के व्यतिकरण के परिणामस्वरूप बनने वाली Localized(स्थानीय) तरंग की तरह व्यवहार करती है जिसकी Group velocity(समूह वेग) कण के वेग के बराबर होती है। इस प्रकार de Broglie सिद्धांत की कमी भी दूर हो जाती है।

Wave Packet
Wave Packet

हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धान्त (Heisenberg uncertainty principle)

चूंकि द्रव्य तरंग(Matter wave) बहुत सारी अलग अलग तरंगदैर्ध्य वाली तरंगों के व्यतिकरण के परिणामस्वरूप बनने वाली Localized तरंग की तरह व्यवहार करती है इसलिए इसका सवेंग अ-निश्चित हो जाएगा, क्योंकि संवेग P=h/λ होता है और द्रव्य तरंग अलग अलग तरंगदैर्ध्य वाली तरंगों से बना हुआ है।

Heisenberg uncertainty principle explained in Hindi part 1
Heisenberg uncertainty principle explained in Hindi part 1

इसलिए अगर हम किसी तरंगदैर्ध्य को निश्चित मानकर कण का संवेग निकले तो इस कण का स्थान अनिश्चित हो जाएगा।

Heisenberg uncertainty principle explained in Hindi part 2
Heisenberg uncertainty principle explained in Hindi part 2

इस प्रकार यहां से यह निष्कर्ष निकलता है कि हम किसी कण (मुख्य रूप से सूक्ष्म कण) का संवेग तथा उसकी स्थिति की एक साथ सही गणना नहीं कर सकते हैं। यही कहलाता है Heisenberg uncertainty principle/हाइजनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत।

ये सिद्धांत यह बताता है चाहे कुछ हो जाए हम किसी भी प्रकार का यंत्र ले आएं फिर भी हम किसी कण के संवेग और उसकी स्थिति की एक साथ गणना नहीं कर सकते हैं यह Quantum Physics का एक प्रमुख नियम है।

द्रव्य तरंग के लिए तरंग फलन समीकरण (Equation for matter wave)

अब बारी आती है Erwin Schrodinger(एर्विन श्रोडिंगर) की जिन्होंने 1926 में द्रव्य तरंग के लिए समीकरण दी।

क्योंकि तरंग के सारे गुण एवं जानकारी तरंग की समीकरण से आसानी से Explain की जा सकती है इसलिए Erwin Schrodinger ने द्रव्य तरंग(matter wave) के explanation के लिए समीकरण दी जिसमे काल्पनिक संख्या भी निहित थी, इस समीकरण को Wave function(तरंग फलन) नाम दिया गया।

Erwin Schrodinger द्वारा दी गई समीकरण कुछ इस प्रकार थी।

श्रोडिंगर की समीकरण
श्रोडिंगर की समीकरण

जब Erwin Schrodinger से यह पूछा गया कि आपने जो समीकरण बताया है उसका वास्तविकता की दुनिया में क्या महत्व है, ये समीकरण द्रव्य तरंग को किस प्रकार Explain करता है और कण के बारे में क्या बताता है क्योंकि समीकरण में तो काल्पनिक संख्या भी है जिसका कि वास्तविकता में कोई मतलब नहीं होता है। तब Erwin Schrodinger ने बड़े मज़े से कहा था कि मुझे नहीं पता।

और इसे पता लगाने का काम किया था Max Born ने। उन्होंने बताया कि इस Wave Function का Amplitude/आयाम कण के पाए जाने की Probability/प्रायिकता को प्रकट करता है।

उनके अनुसार किसी निश्चित समय एवं निश्चित स्थान में Wave Function के परिणाम(Magnitude) का वर्ग (यानी कि Wave Function का उसके Conjugate/संयुग्मी के साथ गुणा करने पर प्राप्त होने वाला परिणाम) कण की उस निश्चित स्थान पर उस निश्चित समय में पाए जाने कि प्रायिकता को बताता है।

जैसे ही यहां Probability की बात आई Erwin Schrodinger और अल्बर्ट आइंस्टीन इस सिद्धांत/Theory के खिलाफ हो गए।

इस प्रायकता वाली Theory के विरोध में मज़ाक उड़ाते हुए Erwin Schrodinger एक thought experiment भी किया था जिसे Schrodinger’s cat experiment के नाम से भी जाना जाता है।

और max born के विरोध में आइंस्टीन ने भी ये कहा था कि (God does not play dice)प्रकृति/भगवान पांसे नहीं खेलते हैं।

Conclusion-

तो यह था Quantum Physics का जन्म से लेकर भौतिक विज्ञान की एक पूर्ण शाखा बनने तक का सफर। जिसमे हमने देखा कि सामान्य भौतिक विज्ञान के नियम सूक्ष्म दुनिया पर बिल्कुल भी लागू नहीं होते है।

हम सामान्य Physics में सामान्य आकार के कणों, पदार्थों की यांत्रिकी को बड़ी ही आसानी से समझ लेते हैं जैसे की कण कहा पर स्थित है और किस दिशा में कितने वेग से गति कर रहा है और कितने समय बाद कहां पहुंच जाएगा।

लेकिन Quantum Physics बिल्कुल इसके विपरीत है हम Quantum mechanics में किसी कण के बारे में इस प्रकार की जानकारी को सही बता ही नहीं सकते हैं बल्कि हम संभावित परिणामों के घटित होने की प्रयिकता ही बता सकते हैं।

क्योंकि इस आर्टिकल में सिर्फ क्वांटम भौतिकी(Quantum physics in hindi) की शुरुवात के बारे में बात की है तो आपको यह थोड़ा confusing जरूर लग सकता है लेकिन जैसे-जैसे आप Quantum Physics को पढ़ते जाएंगे वैसे-वैसे यह आपको और अच्छे से समझ में आता जाएगा।

हमने देखा की जिन Genius लोगो ने Quantum Physics की शुरुवात की बाद में वही लोग इसका विरोध करने लग गए।

इस प्रकार Quantum Physics की शुरूवात में सूक्ष्म कणों के पूर्ण रूप से भिन्न एवं विचित्र व्यवहार ने सभी लोगो प्रश्नों, वैज्ञानिकों को हैरान कर के रख दिया, ना तो हम किसी सूक्ष्म कण के व्यवहार के बारे में बता सकते थे और ना ही इसकी निश्चित स्थिति के बारे में।

अगर इतने बड़े बड़े भौतिक वैज्ञानिक इन सब चीजों पर शक कर सकते हैं और इन चीजों को नहीं समझ पाते है, तो हम जैसे लोग शुरुवाती दिनों में Quantum Physics को समझ नहीं पाते हैं तो चिंतित न हों। आप जितना ज्यादा इसे पढ़ते जाएंगे जितना इससे संबंधित प्रश्नों को करते जाएंगे उतना ज्यादा Quantum Physics आपके लिए समझने में आसान होता जाएगा।

तो यह था हमारा What is Quantum Physics in Hindi (क्वांटम भौतिकी क्या है-हिंदी में) आर्टिकल, अगर आपका इससे संबंधित कोई सवाल या सुझाव हो तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं।

This Post Has 2 Comments

प्रातिक्रिया दे