रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल – परिचय

आज अगर हम किसी से पूछें कि परमाणु की संरचना कैसी होती है तो लगभग सभी लोगो का जवाब होता है कि परमाणु का अधिकतम भाग खाली होता है जिसमे परमाणु के केंद्र में नाभिक मौजूद होता है और उस नाभिक के चारों ओर इलेक्ट्रॉन वृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगाते हैं। जो की रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल है।

परमाणु की इस संरचना के बारे में सबसे पहले रदरफोर्ड ने बताया था इसलिए परमाणु की इस संरचना को रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल (Rutherford Atomic Model in Hindi)कहते हैं।

रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल
रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल

वास्तविकता में रदरफोर्ड द्वारा दी गई परमाणु की यह संरचना परमाणु की पूर्ण रूप से सही तथा वास्तविक संरचना नहीं है। लेकिन यह संरचना पूर्ण रूप से गलत भी नहीं है यही कारण है कि रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल को आज भी इतनी मान्यता प्राप्त है तथा इसे अभी तक पढ़ाया जाता है।

यही वह परमाणु मॉडल या परमाणु संरचना है जो सभी आधुनिक परमाणु संरचनाओं की नीव रखता है तथा इसी परमाणु संरचना को आधार मानकर आज का सबसे आधुनिक परमाणु मॉडल – परमाणु का क्वांटम भौतिकीय मॉडल भी दिया गया है।

इस आर्टिकल में हम यही जानेंगे कि रदरफोर्ड ने किस प्रकार स्वर्ण पत्र प्रयोग या अल्फा प्रकीर्णन प्रयोग (Rutherford Alpha Particle Scattering Experiment in hindi) किया एवं उसकी सहायता से यह परमाणु मॉडल दिया।

रदरफोर्ड का स्वर्ण पत्र प्रयोग या अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग (Rutherford Alpha Particle Scattering Experiment in hindi, Rutherford Gold Foil Experiment in hindi)

रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल के आने से पहले लोग जे जे थॉमसन के परमाणु मॉडल को सही मानते थे जिसमे बताया गया था कि परमाणु धनावेशित गोला होता है जिसमें की इलेक्ट्रॉन यहां वहां बिखरे रहते हैं। जे जे थॉमसन के परमाणु मॉडल के बारे में यहां से पढ़ें।

लेकिन रदरफोर्ड के स्वर्ण पत्र प्रयोग ने इस मॉडल को पूर्ण तरह से गलत साबित करके रख दिया। तथा इसके बाद रदरफोर्ड ने नया परमाणु मॉडल दिया जिसे रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल के नाम से जाना जाता है।

तो चलिए अब जान लेते हैं कि रदरफोर्ड का स्वर्ण पत्र प्रयोग क्या था तथा इससे क्या निष्कर्ष निकले। और किस प्रकार इसकी सहायता से रदरफोर्ड ने परमाणु मॉडल दिया।

प्रयोग (Experiment)

इस प्रयोग मे उन्होंने एक एल्फा कणों का श्रोत लिया। एल्फा कणों के श्रोत के लिए उन्होंने एक रेडियोएक्टिव पदार्थ लिया जो रेडियोएक्टिव क्षय के परिणामस्वरूप एल्फा कणों को छोड़ता है। एक बॉक्स की सहायता से उन्होंने इन एल्फा कणों को संकेंद्रित करके एक तीव्र एल्फा कणों की बीम में बदला जिससे की एल्फा कणों की इस बीम को आगे किसी भी पदार्थ पर बौछरित किया जा सके।

इसके बाद उन्होंने एक बहुत पतली सोने/स्वर्ण की पन्नी ली जिसकी मोटाई 0.00002 मिलीमीटर थी। जैसे कि नीचे चित्र में दिखाया गया है प्रयोग में इस सोने की पतली पन्नी पर एल्फा कणों की बौछार की गई तथा इस सोने की पतली पन्नी से टकराकर इधर उधर प्रकीर्णित/वितरित होने वाले एल्फा कणों की गणना के लिए सोने की पतली पन्नी के चारों ओर एक गोलाकार डिटेक्टर लगा होता है।

रदरफोर्ड का अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग
रदरफोर्ड का अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग

(Note: एल्फा कण – एल्फा कण हीलियम नाभिक होते हैं यानी की इनमें +2e का धनावेश होता है तथा इनका द्रव्यमान लगभग हीलियम परमाणु के बराबर होता है।)

प्रयोग के परिणाम / प्रेक्षण (Observation of Experiment)

जब सोने की पन्नी पर एल्फा कणों की बौछार की गई तो देखा गया कि

1. अधिकतम एल्फा कण अपने मार्ग से बिना विक्षेपित हुए सोने की पतली पन्नी से आर पर चले गए। इससे रदरफोर्ड ने यह निष्कर्ष निकला कि परमाणु का अधिकतम भाग खाली होता है।

2. कुछ कुछ ही ऐसे एल्फा कण थे (औसतन 10,000 में से 14) जो अपने मार्ग से थोड़ा बहुत विक्षेपित हुए, और सोने की पतली पन्नी से पार चले गए। इससे रदरफोर्ड ने यह निष्कर्ष निकाला कि परमाणु में उपस्थित समस्त धनावेश समान रूप से विस्तृत ना होकर एक बहुत छोटे से आयतन में संकेंद्रित है।

3. बहुत ही कम ऐसे एल्फा कण थे (लगभग 20,000 में से 1) जो सोने की पन्नी से टकराकर वापस आ गए या कहें की अपने मार्ग से 180° विक्षेपित हुए। इससे रदरफोर्ड ने यह निष्कर्ष निकाला कि परमाणु का समस्त द्रव्यमान तथा धनावेश परमाणु के आयतन की तुलना में बहुत ही छोटे आयतन में परमाणु के केंद्र में संचित रहता है।

रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल (Rutherford Atomic model in hindi, Rutherford model of atom in hindi)

रदरफोर्ड ने एल्फा कणों के प्रकीर्णन के प्रयोग से प्राप्त जानकारी के आधार पर परमाणु का नाभिकीय मॉडल प्रस्तुत किया जिसे वर्तमान में रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल के नाम से जाना जाता है।

इस परमाणु मॉडल के अनुसार –

• परमाणु अति सूक्ष्म, गोलाकार, विद्युत उदासीन कण होता है जिसका अधिकतम भाग रिक्त होता है।

• परमाणु का समस्त द्रव्यमान तथा समस्त धनावेश उसके केंद्र में एक सूक्ष्म आयतन में संचित रहता है। परमाणु के इस भाग/केंद्र को परमाणु का नाभिक कहते हैं।

• परमाणु में ऋणावेशित कण इलेक्ट्रॉन और धनावेशित कण प्रोटॉन की संख्या समान होती है अतः परमाणु विद्युत उदासीन होता है।

• प्रोटॉन धनावेशित भारी कण होते हैं जो कि परमाणु के केंद्र में मौजूद होते हैं और परमाणु के नाभिक का निर्माण करते हैं।

• जबकि इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित कण होते हैं और ये परमाणु में नाभिक के चारों ओर वृत्तीय/गोलाकार पथों पर बहुत उच्च वेग से घूमते हैं, इन पथों को इलेक्ट्रॉनों की कक्षाएं कहते हैं।

रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल
रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल

आप रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल (Rutherford Model of Atom in Hindi) की तुलना सौर मंडल की संरचना से कर सकते हैं जिस प्रकार ग्रह सूर्य से गुरूत्वीय बल से बंधे रहते है तथा सूर्य का चक्कर काटते रहते हैं ठीक उसी प्रकार रदरफोर्ड के अनुसार परमाणु में इलेक्ट्रॉन नाभिक से विद्युत आवेश के आकर्षण बल से बंधे रहते हैं तथा नाभिक का चक्कर काटते रहते हैं।

रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की कमियां तथा दोष (Limitations Of Rutherford Atomic model in hindi)

रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की कमियां कुछ इस प्रकार हैं –

1. रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल से वृत्तीय कक्षाओं में नाभिक का चक्कर लगा रहे इलेक्ट्रॉन के बारे में कोई भी जानकारी प्राप्त नहीं होती है। जैसे कि इलेक्ट्रॉन किन कक्षाओं में घूमते हैं, किस वेग से घूमते हैं तथा विभिन्न कक्षाओं ने इलेक्ट्रॉन कि संख्याएं क्या हैं, आदि, की जानकारी इस परमाणु मॉडल से प्राप्त नहीं होती है।

2. मैक्स वेल के विद्युत गतिकी के सिद्धांत अनुसार प्रत्येक त्वरित आवेशित कण विकिरण के रूप में ऊर्जा उत्सर्जित करता है। चूंकि इलेक्ट्रॉन अपनी कक्षा में घूमते हुए लगातार अभिकेंद्रीय त्वरण के अंतर्गत होता है इसलिए इलेक्ट्रॉन को भी लगातार विकिरण के रूप में ऊर्जा का ह्रास करना चाहिए। अतः ऊर्जा के ह्रास के कारण इलेक्ट्रॉन की नाभिक से दूरी लगातार काम होती जाएगी और कुछ समय पश्चात इलेक्ट्रॉन नाभिक में जाकर गिर जाएगा। इस प्रकार यह रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर पाता है।

रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की कमी
रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की कमी

3. परमाणु से लगातार सतत ऊर्जा ह्रास के कारण निकलने वाले विकिरण का स्पेक्ट्रम भी सतत होना चाहिए। लेकिन वास्तविकता में परमाणु से निकलने वाले विकिरण का स्पेक्ट्रम असतत/रेखीय होता है। इस प्रकार रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल परमाणु से उत्सर्जित होने वाले विकिरण के स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं कर पाता है।

Conclusion

तो इस आर्टिकल में हमने देखा कि किस प्रकार रदरफोर्ड ने स्वर्ण पत्र प्रयोग (Gold Foil Experiment in Hindi) किया। तथा इस स्वर्ण पत्र प्रयोग से प्राप्त परिणामों के आधार पर रदरफोर्ड ने किस प्रकार नया परमाणु मॉडल प्रस्तावित किया जिसे बाद में रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल के नाम से जाना जाने लगा।

उम्मीद है ये आर्टिकल रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल (Rutherford model of atom in hindi, Rutherford Atomic Model in Hindi) आपको पसंद आया होगा। अगर आपका कोई भी सवाल हो तो आप नीचे कमेंट करके हमसे पूछ सकते हैं हम आपको उसका जवाब देने की गारंटी देते हैं।

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धन्यवाद।

FAQ – Frequently Asked Questions about Rutherford Atomic model in hindi

  • रदरफोर्ड ने परमाणु मॉडल कब दिया ?

    रदरफोर्ड ने परमाणु मॉडल सन 1911 में दिया।

  • रदरफोर्ड ने सोने की पन्नी का ही इस्तेमाल क्यों किया ?

    क्योंकि सोना बहुत ही तन्य धातु है। इसके इसी गुण के कारण सोने को बहुत अधिक पतली परत/पन्नी के रूप में बदला जा सकता है।
    चूंकि सोने की यह पन्नी इतनी अधिक पतली होती है कि इसमें परमाणु की सिर्फ कुछ ही परतें मौजूद होती हैं अतः इस प्रयोग को करने के लिए सोने की पन्नी सबसे उपयुक्त धातु की पन्नी है।

  • प्रोटॉन की खोज किसने की थी ?

    प्रोटॉन की खोज भी अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने ही की थी।

यह भी पढ़ें – रदरफोर्ड ने परमाणु की खोज कैसे की थी

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