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सामान्यतः सूर्य एवं उसके गुरुत्वाकर्षण बल के कारण उसके चारों ओर परिक्रमा करते हुए ग्रहों एवं प्राकृतिक उपग्रहों(चंद्रमा), क्षुद्रग्रहों, उल्का पिंडों एवं धूमकेतुओं से बना हुआ सामूहिक तंत्र सौरमण्डल कहलाता है।

सौरमण्डल का परिचय (Introduction to Solar System in Hindi) –

शुरुआत में 15 वीं शताब्दी तक हम यही समझते हुए आये थे कि हमारी पृथ्वी सौरमण्डल के  मध्य में स्थित है,एवं सूर्य व अन्य आकाशीय पिंड  इसका चक्कर लगाते हैं,लेकिन 16 वीं शताब्दी में निकोलस कोपरनिकस (Nicolaus Copernicus) ने अपने हेलियोसेंट्रिक मॉडल से दुनिया को बताया की सौरमण्डल का केंद्र पृथ्वी नहीं बल्कि सूर्य है और सारे ग्रह व अन्य आकाशीय पिंड सूर्य का चक्कर लगाते हैं ।

तब से लेकर आज तक खगोलिकी में हम इंसानों की सोच लगातार ही बदलती रही है, एवं हमारे द्वारा किये गए विकास के ज़रिये आज हम आकाशीय खगोलिकी के बारे में बहुत कुछ जानते हैं, साथ ही साथ आज हमारे पास अपने सौरमण्डल के बारे में चर्चा करने के लिए भी बहुत से दिलचस्प विषय एवं वस्तु हैं।

अगर आप भी सौरमण्डल (Information about solar system) के बारे में जानने की रुचि रखते हैं तो चलिए सौरमण्डल को लेकर आपकी इस रूचि एवं दिलचस्पी को और अधिक बढाने के लिए शुरू करते हैं,सौरमण्डल एवं उसमें मौजूद विभिन्न वस्तुओं एवं विभिन्न जानकारियों की का ये रोमांचक सफर।

सौरमण्डल
सौरमण्डल

सौरमण्डल किसे कहते हैं (What is Solar system in hindi)

सामान्यतः सूर्य एवं उसके गुरुत्वाकर्षण बल के कारण उसके चारों ओर परिक्रमा करते हुए ग्रहों एवं प्राकृतिक उपग्रहों(चंद्रमा), क्षुद्रग्रहों, उल्का पिंडों एवं धूमकेतुओं से बना हुआ सामूहिक तंत्र सौरमण्डल कहलाता है।

सौरमण्डल की आकाशगंगा में स्थिति एवं गति – हमारा सौरमण्डल हमारी मिल्की वे आकाशगंगा के केंद्र से 27000 प्रकाश वर्ष दूर आकाशगंगा की बाहरी सर्पिल भुजा पर मौजूद है एवं लगातार ही 8,28,000 किमी./घण्टा की गति से आकाशगंगा के केंद्र की परिक्रमा कर रहा है। तथा आकाशगंगा के केंद्र की एक परिक्रमा करने में हमारे सौरमण्डल को 23 करोड़ पृथ्वी वर्षों का समय लगता है।

position of solar system in position of solar system in milky way galaxymilky way galaxy
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साथ ही साथ हमारे सौरमण्डल के अलावा भी हमारी आकाशगंगा में लगभग 100 अरब (100 Billion) सौरमण्डल मौजूद हैं, जिनमें से अभी तक सिर्फ 500 सौरमण्डल की ही पहचान वैज्ञानिकों द्वारा अभी तक की जा चुकी है। तथा यह संख्या लगातार ही बढ़ती जा रही है।

सौरमण्डल का निर्माण (Formation of Solar System in hindi)

इस सामूहिक तंत्र का निर्माण आज से करीब 4.5 अरब साल पहले बहुत बड़ी मात्रा में गैस एवं धूल के बेहद ही घने बादलों के आपस में मिलने से हुआ। इन घने बादलों के आपस में मिलने से सर्वप्रथम बड़ी मात्रा में पदार्थ को समेटे एक घूमती हुई विशालकाय नेब्यूला का निर्माण हुआ।

गुरुत्वाकर्षण बल के प्रबल प्रभाव के कारण सर्वाधिक पदार्थ (लगभग 99%) इसके केंद्र में इकट्ठा हो गए एवं केंद्र में प्रबल गुरुत्वाकर्षण बल एवं दबाव के कारण हाइड्रोजन परमाणु आपस में संलयित (fusion) होकर हीलियम परमाणुओं में बदलने लगे जिससे बड़ी मात्रा में ऊर्जा का उत्पादन होने लगा। इस तरह से हमारे सौरमण्डल की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी सूर्य का जन्म हुआ।

solar system in its early phase
solar system in its early phase

केंद्र में सूर्य के निर्माण के पश्चात नेब्यूला में बचे हुए पदार्थ का लगातार गतिमय होने एवं आपस में होने वाले टकराव से नए पिंडों का निर्माण हुआ जिनमें कुछ पिंड बहुत ही बड़े तो कुछ बहुत ही छोटे थे। जिन्हें आगे चलकर हमने अपनी परिभाषा के अनुसार ग्रह, उपग्रह, बौने ग्रह, क्षुद्रग्रह, धूमकेतु जैसे नाम एवं श्रेणीयाँ दी।

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सौरमण्डल का आकार(Size of solar system in hindi)

हमारा सौरमण्डल बेहद ही विशाल है जिसके फैलाव की कल्पना भी हमारे लिए काफी कठिन लगती है। लेकिन फिर भी अगर इस फैलाव को दूरी एवं मात्रक के द्वारा दर्शाया जाए तो पता चलता है कि हमारे सौरमण्डल का व्यास लगभग 287.46 अरब किमी. है।

हालांकि हमारा सौरमण्डल 8 ग्रह एवं बहुत से उपग्रह, बौने ग्रह, क्षुद्रग्रह, धूमकेतु एवं काइपर घेरा, बिखरी डिस्क जैसी विभिन्न वस्तुएँ समेटे हुए है लेकिन अगर हमें अभी तक ज्ञात हमारे सौरमण्डल की आखिरी सीमा की बात करें तो वह है, “आर्ट क्लाउड” जिसके आगे वर्तमान में हम कुछ भी नहीं जानते हैं।

● मिशन – सौरमण्डल के आर्ट क्लाउड से बाहर आज तक इंसानी सभ्यता द्वारा सिर्फ 5 ही मिशन किये गए हैं जिनमें से 1977 में नासा द्वारा संचालित मात्र 2 मिशन वॉयजर 1-(Voyager-1) एवं वॉयजर-2 (Voyager-2) ही सफल हो पाए हैं जो की आज भी सक्रिय हैं और अंतरिक्ष में गति मान हैं।

हमारे सौरमण्डल में मौजूद ऐसे ही विभिन्न तरह की वस्तुओं की उपस्थिति एवं उनकी मात्रा (information about solar system in hindi) का ऊपरी ज्ञान आपको नीचे दी गयी सारणी की मदद से मिल सकता है –

ग्रह (Planets)8 (आठ)
बौने ग्रह (Dwarf Planet)5 ( पाँच )
प्राकृतिक उपग्रह (Natural Satellite)200 से अधिक
ज्ञात क्षुद्रग्रह (Known Asteroids)1,036,899 ( लगभग )
ज्ञात धूमकेतु (Known Comet)3,695 (लगभग)

सौरमंडल सम्बन्धी जानकारी (Information about solar system in hindi)

क्योंकि हम जानते हैं कि हमारा सौरमण्डल विभिन्न तरह के ग्रह, उपग्रह, छुद्रग्रह, धूमकेतु आदि वस्तुओं का समूह है, तो सौरमण्डल की जानकारी लेते समय ये जरूरी हो जाता है कि हमें इन सब का भी भलीभांति ज्ञान हो।

तो चलिए सौरमण्डल में मौजूद ऐसे ही विभिन्न विषय वस्तुओं के बारे में जान लें –

सूर्य (Sun in hindi)

सूर्य लगभग 75% हाइड्रोजन, 24% हीलियम एवं अन्य गैसों से निर्मित बेहद ही गर्म गोला है, यह हमारे सौरमण्डल का सबसे महत्वपूर्ण घटक है, यदि सूर्य की महत्ता की बात की जाए तो हम आपको बता दें कि हमारे सौरमण्डल की सबसे अहम कड़ी सूर्य ही है।

सूर्य के बेहद मजबूत गुरुत्वाकर्षण बल के खिंचाव के कारण ही हमारा सौरमण्डल इस आकार में निरंतर बना हुआ है। और हमारे सौरमण्डल का लगभग 99.85% भार सूर्य का ही है।

sun
sun

सूर्य की कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ (Information about Sun in hindi)

सूर्य की पृथ्वी से दूरी149,597,870 किलोमीटर
आकाशगंगा के केंद्र से दूरी2.7×1027 किलोमीटर (27,200 प्रकाश वर्ष)
सूर्य की त्रिज्या696,340 किलोमीटर (109×पृथ्वी की त्रिज्या)
द्रव्यमान1.9885×1030 किलोग्राम (पृथ्वी का 333,000 गुना)
क्षेत्रफल6.09×1012 वर्ग किलोमीटर (पृथ्वी का 12,000 गुना)
औसत घनत्व1.408 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर (पृथ्वी का 0.255 गुना)
सतह का गुरुत्वाकर्षण274 मीटर प्रति सेकेंड2 (पृथ्वी का 28 गुना)
पलायन वेग617.7 किलोमीटर प्रति सेकेंड

सूर्य के केंद्र में हो रहे लगातार संलयन के कारण ही हमें इससे निरंतर ऊर्जा प्राप्त होती है, एक आंकड़े के अनुसार सूर्य प्रति 1 सेकेंड में तक़रीबन 60 करोड़ टन हाइड्रोजन का हीलियम में संलयन कर देता है।

अब इस आंकड़े से आप यह तो समझ ही चुके होंगे कि सूर्य कैसे और कितने बड़े पैमाने पर ऊर्जा का निर्माण करता है। और इसी ऊर्जा के कारण सूर्य से उसके चारों ओर परिक्रमा करने वाले ग्रहों को ऊर्जा तथा गर्मी मिलती है। एवं पूर्ण आकाशगंगा में हमारा तारा सूर्य अन्य मौजूद 85% तारों से भी अधिक चमकदार है।

सूर्य पर किये गए मिशन (Mission on sun in hindi)

हालाँकि हमारी तकनीक अभी इतनी विकसित नहीं हो पाई है, कि जिससे हम सूर्य को नज़दीक से जान पाए, लेकिन बावजूद इसके सूर्य के अन्य गुणों का पता लगाने के लिए विश्व भर से आज तक 21 मिशन हो चुके हैं, जिसमें अप्रैल 1960 में नासा द्वारा सबसे प्रथम यान पायनियर 5 (Pioneer 5) सूर्य की जाँच के लिए भेजा गया था और यह मिशन सफल रहा।

सूर्य से संबंधित रोचक तथ्य – जनवरी 2022 में इसरो भी सूर्य की जाँच के लिए एक यान का प्रक्षेपण करने वाला है जिसका नाम आदित्य-एल-1 (Aditya L-1) रखा गया है।

सौरमण्डल के ग्रह (Planets of solar system in hindi)

हम सभी जानते हैं कि हमारे सौरमण्डल में कुल 8 ग्रह हैं, जो की इस प्रकार हैं – बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण एवं वरुण। ये सभी ग्रह आकार और बनावट में एक दूसरे से काफी अलग हैं, ऐसी ही कुछ भिन्नताओं के कारण इन ग्रहों को दो अलग-अलग भागों में बाँटा गया है।

जो इस प्रकार हैं –

1. आंतरिक ग्रह (Terrestrial or Inner Planets of solar system in hindi)

2. बाहरी ग्रह (Jovian or Outer Planets of solar system in hindi)

Planets of solar system in hindi
Planets of solar system in hindi

आंतरिक ग्रह या चट्टानी ग्रह (Terrestrial or Inner Planets of solar system in hindi)

ये ठोस सतह वाले चट्टानी ग्रह होते हैं, जिनका आकार छोटा लगभग पृथ्वी के समरूप होता है तथा ये ग्रह यह सूर्य के नज़दीकी ग्रह हैं इसलिए इन्हे आंतरिक ग्रह भी कहते हैं। इस श्रेणी में चार ग्रह बुध,शुक्र,पृथ्वी,मंगल आते हैं।

बुध ग्रह (Mercury planet in hindi)

हमारे सौरमण्डल का सबसे छोटा एवं सौरमण्डल में सूर्य के सबसे नज़दीक मौजूद ग्रह बुध ग्रह के नाम से जाना जाता है  सूर्य से इस निकटता के कारण बुध ग्रह को सूर्य का चक्कर लगाने में सबसे कम समय लगता है, एवं साथ ही साथ बुध के पास अपना चुम्बकीय क्षेत्र भी उपलब्ध है।

Mercury planet in hindi
Mercury planet in hindi
बुध की कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ (Information about mercury planet in hindi)
बुध ग्रह की सूर्य से दूरी57,909,227 किलोमीटर
बुध ग्रह द्वारा सूर्य की परिक्रमा में लिया जाने वाला समय (1 वर्ष)87.97 पृथ्वी दिन
बुध ग्रह का घूर्णन (1 दिन)58.646 पृथ्वी दिन
बुध ग्रह बुध की त्रिज्या2439.7 किलोमीटर
बुध ग्रह का द्रव्यमान3.30×1023 किलोग्राम
बुध ग्रह का क्षेत्रफल74,797,000 वर्ग किलोमीटर
बुध ग्रह का औसत घनत्व 5.43 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर
बुध ग्रह की सतह का गुरुत्वाकर्षण3.7 मीटर प्रति सेकेंड2
बुध ग्रह का पलायन वेग4.25 किलोमीटर प्रति सेकेंड
ज्ञात प्राकृतिक उपग्रह (चन्द्रमाएँ)0

यह भी पढ़ें – बुध ग्रह के बारे में जानकारी

बुध ग्रह पर वायुमंडल की अनुपस्थिति के कारण बुध ग्रह पर जीवन नहीं है, साथ ही साथ वायुमंडल (atmosphere) की अनुपस्थिति के कारण ही बुध सूर्य से मिली गर्मी को बनाये नहीं रख सकता है जिससे बुध ग्रह पर दिन और रात में तापमान में काफी अंतर देखने को मिलता है, दिन (सूर्य की उपस्थिति) में बुध ग्रह का तापमान 430℃ वहीं रात के समय (सूर्य की अनुपस्थिति) में तापमान -180℃ पहुँच जाता है, जो की बुध ग्रह को सौरमण्डल का दूसरा सबसे गर्म ग्रह बनता है।

बुध पर किये गए मिशन – बुध ग्रह के वातावरण एवं उसमें जीवन एवं अन्य महत्वपूर्ण जाँच के लिए बुध ग्रह पर आजतक 2 मिशन हो चुके हैं, जिनमें पहला मिशन नासा द्वारा 1974-75 में मेरिनर 10 (Mariner 10) सफलता पूर्वक किया गया था। बुध ग्रह पर भविष्य में 2025-26 तक 3 मिशन और होने वाले हैं।

शुक्र (Venus planet in hindi)

शुक्र ग्रह घनत्व,आकार एवं संरचना में पृथ्वी के सामान होने के कारण पृथ्वी की “जुड़वा बहन” के नाम से भी जाना जाता है जो हमारे सौरमण्डल में सूर्य का दूसरा सबसे नज़दीकी ग्रह है।

शुक्र बेहद ही चमकीला ग्रह है, रात्रि में आसमान पर चंद्रमा के बाद सबसे अधिक चमकने वाली वस्तु और कुछ नहीं बल्कि शुक्र ही होती है।

लेकिन शुक्र काफी विचित्र व्यवहार भी प्रदर्शित करता है जिसमें से एक यह है कि शुक्र ग्रह का एक दिन (243 पृथ्वी दिन) शुक्र ग्रह के एक वर्ष (225 पृथ्वी दिन) से भी बड़ा है।

venus
venus
शुक्र की कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ (Information about Venus planet in hindi)
शुक्र ग्रह की सूर्य से दूरी108,209,475 किलोमीटर
शुक्र ग्रह द्वारा सूर्य की परिक्रमा में लिया जाने वाला समय (1 वर्ष)224.7 पृथ्वी दिन
शुक्र ग्रह का घूर्णन (1 दिन)243 पृथ्वी दिन
शुक्र ग्रह बुध की त्रिज्या6,051.8 किलोमीटर
शुक्र ग्रह का द्रव्यमान4.87×1024 किलोग्राम
शुक्र ग्रह का क्षेत्रफल4.6×108 वर्ग किलोमीटर
शुक्र ग्रह का औसत घनत्व5.24 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर
शुक्र ग्रह की सतह का गुरुत्वाकर्षण8.87 मीटर प्रति सेकेंड2
शुक्र ग्रह का पलायन वेग10.4 किलोमीटर प्रति सेकेंड
ज्ञात प्राकृतिक उपग्रह (चन्द्रमाएँ)0

यह भी पढ़ें – शुक्र ग्रह के बारे में जानकारी

शुक्र  भी जीवन के पनपने के लिए उपयुक्त ग्रह नहीं है जिसके पीछे का सबसे बड़ा कारण यह है कि शुक्र ग्रह का वायुमंडल बेहद ही सघन हो जो की मूल रूप से कार्बन डाई-ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैस से मिलकर बना है।

जिसकी वजह से शुक्र पर बहुत अधिक ग्रीन हाउस प्रभाव होता है और शुक्र पर सूर्य से आने वाली सारी गर्मी यहीं रुक जाती है जिससे शुक्र का तापमान 465℃ से भी अधिक हो जाता है। जो हमारे ब्रह्मांड में मौजूद सभी ग्रहों में सबसे अधिक है।

साथ ही साथ शुक्र ग्रह की सतह पर वायु दाब पृथ्वी पर लगने वाले वायुदाब से करीब 90 गुना अधिक है। इतना अधिक वायुदाब पृथ्वी पर समुद्र में 1 मील से अधिक की गहराई पर देखने को मिलता है।

शुक्र ग्रह पर किये गए मिशन – शुक्र पर आजतक 52 मिशन हो चुके हैं, जिनमें पहला मिशन 4 फरवरी 1961 को रूस द्वारा स्पुतनिक (Sputnik) किया गया था। शुक्र ग्रह पर भविष्य में 6 और मिशन किये जाने वाले हैं, जिनमें से एक मिशन इसरो द्वारा 2025 में किया जाने वाला है जिसका नाम शुक्र यान-1 दिया गया है।

शुक्र के रोचक तथ्य – शुक्र हमारे सौरमण्डल का वह पहला ग्रह है जिस पर पहली बार पृथ्वी से अंतरिक्ष यान भेजा गया था।

पृथ्वी (Earth in hindi)

हम सब ही जानते हैं कि पृथ्वी सूर्य से तीसरे क्रम का एक नीला ग्रह है। आकार एवं द्रव्यमान की दृष्टि से यह सौरमण्डल का पाँचवाँ सबसे बड़ा ग्रह है।

पृथ्वी के संतुलित तापमान (14℃ से 15℃) के कारण यह एकमात्र ऐसा ग्रह जहाँ सतह पर पानी द्रवित अवस्था में मौजूद है,0पृथ्वी की कुल 71% सतह पानी से घिरी हुई है। जिनमें महासागर, समुद्र, नदियाँ, झीलें आदि हैं।

Earth
Earth
पृथ्वी की कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ (Information about Earth in hindi)
पृथ्वी की सूर्य से दूरी149,597,870 किलोमीटर
पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा में लिया जाने वाला समय (1 वर्ष)365.26 दिन
पृथ्वी का घूर्णन (1 दिन)23 घण्टे 56 मिनट
पृथ्वी बुध की त्रिज्या6,371 किलोमीटर
पृथ्वी का द्रव्यमान5.972×1024 किलोग्राम
पृथ्वी का क्षेत्रफल510,072,000 वर्ग किलोमीटर
पृथ्वी का औसत घनत्व 5.51 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर
पृथ्वी की सतह का गुरुत्वाकर्षण9.806 मीटर प्रति सेकेंड2
पृथ्वी का पलायन वेग11.186 किलोमीटर प्रति सेकेंड
ज्ञात प्राकृतिक उपग्रह (चन्द्रमाएँ)1 चंद्रमा

पृथ्वी अभी तक ज्ञात इस पूरे ब्रह्मांड का एकमात्र ऐसा ग्रह है जहाँ जीवन भलीभाँति पनपा भी है, एवं लगातार ही विकास कर रहा है।

जिसके पीछे के कारण पृथ्वी का संतुलित तापमान, संतुलित वायुदाब, वायुमंडल का बेहद ही रक्षात्मक रूप से कार्य करना, साथ ही साथ पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र जो सूर्य से आने वाले हानिकारक आवेशित कणों से पृथ्वी के जीवन की रक्षा करता है।

पृथ्वी पर किये गए मिशन – पृथ्वी की जांच के लिए भी आजतक पृथ्वी पर 31अंतरिक्ष मिशन किये जा चुके हैं, जिनमें पहला मिशन यूरोपीय अंतरिक्ष अनुसंधान द्वारा 2 जुलाई 1990 को जिओट्टो (Giotto) किया गया था।

पृथ्वी के पास स्वयं का एक प्राकृतिक उपग्रह भी है, जिसे हम चंद्रमा कहा करते हैं।

चंद्रमा (Moon in Hindi)

रात्रि के समय पृथ्वी से आसमान में सर्वाधिक चमकदार दिखाई देने वाली वस्तु ही चन्द्रमा है। जो कि पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है। और साथ ही हमारे संपूर्ण सौरमण्डल का पाँचवाँ सबसे बड़ा उपग्रह चंद्रमा है।

पृथ्वी के अलावा यह सौरमण्डल की एकमात्र ऐसी प्राकृतिक जगह है जहाँ कोई इंसान आज तक अपने कदम रख पाया है, पहली बार चंद्रमा पर जाने वाले मनुष्य नील आर्मस्ट्रांग और बज ऑल्ड्रिन थे।

हालांकि चंद्रमा रात्रि के समय सर्वाधिक चमक वाली वस्तु है लेकिन सच तो ये है कि चंद्रमा के पास खुद का प्रकाश नहीं होता है बल्कि वह सूर्य के प्रकाश के कारण ही इतनी चमक प्रदर्शित कर पाता है।

चंद्रमा
चंद्रमा
चंद्रमा की कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ (Information about Moon in hindi)
पृथ्वी से दूरी384,400 किलोमीटर
पृथ्वी की परिक्रमा का समय27.37 पृथ्वी दिन
चंद्रमा की त्रिज्या1,737 किलोमीटर
चंद्रमा का द्रव्यमान0.0735×1024 किलोग्राम
चंद्रमा का क्षेत्रफल37,900,000 वर्ग किलोमीटर
चंद्रमा का औसत घनत्व3.34 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर
चंद्रमा की सतह का गुरुत्वाकर्षण1.62 मीटर प्रति सेकेंड2
चंद्रमा का पलायन वेग2.38 किलोमीटर प्रति सेकेंड

चंद्रमा के बेहद ही पतले वायुमंडल के कारण इस पर भी जीवन की उपलब्धता नहीं है। लेकिन भविष्य में इंसानों द्वारा मंगल ग्रह पर इंसानी बस्ती बनाने की योजना में इंसानों की पहली नजर चंद्रमा पर ही है, ताकि चंद्रमा को मंगल तक जाने वाले रास्ते में एक स्टॉप की तरह प्रयोग किया जाए। इसी मिशन को आगे बढ़ाते हुए नासा 2024 में चंद्रमा पर पहली महिला एवं अगले पुरुष को भेजने की योजना बनाने में जुटा हुआ है।

चंद्रमा के रोचक तथ्य – हम आजतक चंद्रमा का सिर्फ एक ही हिस्सा देख पाए हैं, क्योंकि चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर इस प्रकार लगाता है कि उसका सिर्फ एक ही हिस्सा हमें दिखाई पढ़ता है, इसी वजह से हम आजतक चंद्रमा का दूसरा हिस्सा नहीं देख पाए हैं, एवं कोई नहीं जानता कि वह हिस्सा कैसा दिखाई देता है और उसमें किन किन तत्वों की उपस्थिति है।

चंद्रमा पर किये गए मिशन – आजतक चंद्रमा पर विश्व भर से 128 मिशन मिशन किये जा चुके हैं, जिनमें पहला मिशन पायनियर-0 (Pioneer-0) 17 अगस्त 1958 को अमेरिकी रक्षा विभाग (DOD) द्वारा किया गया था। इसके साथ साथ इसरो द्वारा भी आज तक चंद्रमा पर 4 मिशन किये जा चुके हैं जिनमें पहला मिशन सन 2008-09 में चन्द्र-यान 1 किया गया था, एवं 2021 में इसरो चन्द्र-यान 3 मिशन भी करने जा रहा है।

मंगल ग्रह (Mars Planet in hindi)

मंगल हमारे सौरमण्डल में सूर्य से चौथा एवं आकार की दृष्टि से दूसरा सबसे छोटा, लाल रंग सा दिखाई देने वाला ग्रह है। जो कि एक धूलीय, ठंडा, रेगिस्तानी ग्रह है,जिसका कारण इसका बेहद ही पतला वायुमंडल है।

Mars
Mars
मंगल की कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ (Information about mars planet in hindi)
मंगल ग्रह की सूर्य से दूरी227,943,824 किलोमीटर
मंगल ग्रह द्वारा सूर्य की परिक्रमा में लिया जाने वाला समय (1 वर्ष)686.98 पृथ्वी दिन
मंगल ग्रह का घूर्णन (1 दिन)24 घण्टे 39 मिनट 36 सेकेंड
मंगल ग्रह बुध की त्रिज्या3,389.5 किलोमीटर
मंगल ग्रह का द्रव्यमान6.417×1023 किलोग्राम
मंगल ग्रह का क्षेत्रफल1.44×108 वर्ग किलोमीटर
मंगल ग्रह का औसत घनत्व3.93 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर
मंगल ग्रह की सतह का गुरुत्वाकर्षण3.711 मीटर प्रति सेकेंड2
मंगल ग्रह का पलायन वेग5.03 किलोमीटर प्रति सेकेंड
ज्ञात प्राकृतिक उपग्रह (चन्द्रमाएँ)2

मंगल ग्रह पर अधिकांश तौर पर कार्बनडाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन एवं ऑर्गन गैसों से मिलकर बने बेहद ही पतले वायुमंडल के कारण इस ग्रह पर भी जीवन की उपस्थिति नहीं है। एवं इस वायुमंडल के कारण मंगल ग्रह का अधिकतम तापमान लगभग 20℃ एवं न्यूनतम तापमान लगभग -153℃ तक पहुँच जाता है।

हालांकि मंगल पर जीवन मौजूद नहीं है लेकिन महान वैज्ञानिक, बिजनेसमैन एवं बहुमुखी प्रतिभा के धनी इलोन मस्क (Elon Musk) टेक्नोलॉजी के बेहद ही उम्दा प्रयोग से 2024-2026 तक मंगल ग्रह पर इंसानी बस्तियाँ बनाने की सोच रहे हैं।

मंगल ग्रह पर किये गए मिशन – मंगल ग्रह पर आजतक 66 मिशन किये जा चुके हैं जिनमें पहला मिशन 10 अक्टूबर 1960 को रूस द्वारा Mars 1M No.1 नाम से किया गया था जो असफल रहा। एवं मंगल पर पहला सफल मिशन नासा द्वारा 15 जुलाई 1965 को Mariner 3 (मेरिनर 3) किया गया था।

24 सितम्बर 2014 में इसरो ने भी मंगल ग्रह की कक्षा में मंगल यान नाम का अंतरिक्ष यान स्थापित किया और अपनी पहली ही कोशिश में सफलता हासिल की। इसके बाद इसरो द्वारा भविष्य में मंगलयान 2 किया जाने वाला है।

मंगल ग्रह के रोचक तथ्य मंगल पर इस सौरमण्डल का सबसे बड़ा ज्वालामुखी ओलम्पस मोंस है। जिसकी ऊँचाई पृथ्वी पर मौजूद हिमालय पर्वत से तीन गुना ज्यादा है।

मंगल के प्राकृतिक उपग्रह (Natural satellites of Mars in hindi)

अभी तक ज्ञात मंगल ग्रह के दो प्राकृतिक उपग्रह (चंद्रमा) हैं। फोबोस और डीमोस।

डीमोस – डीमोस हमारे सौरमण्डल का अभी तक का ज्ञात सबसे छोटा चंद्रमा है। जिसका व्यास सिर्फ 12.4 किलोमीटर ही है।

फोबोस – फोबोस मंगल का दूसरा ज्ञात चंद्रमा है, जिसका व्यास 22.533 किमी. है। मंगल के उपग्रह फोबोस पर आजतक 6 मिशन रूस द्वारा किये जा चुके हैं, हालाँकि उनमें से कोई भी मिशन सफल नहीं हो पाया।

क्षुद्रग्रह घेरा (Asteroid belt in hindi)

क्षुद्रग्रह, जिन्हें कभी-कभी नाबालिक ग्रह भी कहा जाता है, लगभग 4.6 अरब साल पहले हमारे सौरमण्डल के प्रारंभिक गठन से बचे हुए चट्टानी अवशेष हैं।

हमारे सौरमण्डल के अधिकांश क्षुद्रग्रह (Asteroids) मंगल ग्रह और बृहस्पति ग्रह के बीच एक रिंग के रूप में सूर्य का चक्कर लगाते हैं इन क्षुद्रग्रह से बनी बेल्ट रूपी संरचना को क्षुद्रग्रह घेरा (Asteroid belt) कहते हैं।

Asteroid Belt
Asteroid Belt Image source – Wikipedia

इस घेरे में मुख्यतः तीन तरह के क्षुद्रग्रह पाए जाते हैं।

C तरह के – ये हमारे सौरमण्डल के सबसे पुराने क्षुद्रग्रह एवं अधिकांश तौर पर पाए जाने वाले क्षुद्रग्रह हैं, जो मुख्य रूप से मिट्टी एवं सिलिकेट के बने हैं।

S तरह के – सौरमण्डल में पाए जाने वाले ये क्षुद्रग्रह सिलिकेट, निकिल एवं लोहे जैसी धातुओं से मिलकर बने हैं।

M तरह के – इस तरह के क्षुद्रग्रह निकिल एवं लोहे जैसी धातुओं से मिलकर बने हैं।

क्षुद्रग्रह घेरा (Asteroid belt) पर किये गए मिशन – क्षुद्रग्रहों की जांच के लिए आजतक कुल 25 मिशन किए जा चुके हैं, जिनमें सर्वप्रथम मिशन नासा द्वारा 29 अक्टूबर 1991 को गैलीलियो यान द्वारा सफलता पूर्वक किया गया था। भविष्य में क्षुद्रग्रह घेरा (Asteroid belt) की जांच के लिए 21 मिशन और किये जाने वाले हैं।

रोचक तथ्य – हमारे सौरमण्डल का सबसे बड़ा क्षुद्रग्रह सायरस (Ceres) भी इस क्षुद्रग्रह घेरे में ही मौजूद है। जिसका व्यास 939.4 किलोमीटर है।

बाहरी ग्रह (Jovian or Outer Planets of solar system in hindi)

ये सभी ग्रह जो सूर्य से काफी दूर रहते हुए उसका चक्कर लगाते हैं, आकार में काफी बड़े होते हैं तथा ये सारे ग्रह पूर्ण रूप से गैस से बने होते हैं। ऐसे ग्रह जोवियन या बाहरी ग्रह कहलाते हैं।

हमारे सौरमण्डल के जो ग्रह जोवियन्स की श्रेणी में आते हैं, इस प्रकार हैं- बृहस्पति, शनि, अरुण एवं वरुण।

बृहस्पति (Jupiter planet in hindi)

बृहस्पति सूर्य से पाँचवें स्थान का एवं हमारे सौरमण्डल का सबसे विशालकाय, गैस से निर्मित ग्रह है। सौरमण्डल के सभी ग्रहों को भी यदि मिला दिया जाए तब भी बृहस्पति अकेले उन सभी ग्रहों के आकार के दोगुने से भी ज्यादा होगा।

बृहस्पति के इस विशालकाय रूप के कारण इसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र भी इतना शक्तिशाली है कि कई बार इसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र पृथ्वी एवं पृथ्वी के चंद्रमा को भी प्रभावित कर देता है।

Jupiter
Jupiter
बृहस्पति की कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ (Information about Jupiter planet in hindi)
बृहस्पति ग्रह की सूर्य से दूरी778,460,000 किलोमीटर
बृहस्पति ग्रह द्वारा सूर्य की परिक्रमा में लिया जाने वाला समय (1 वर्ष)11.86 पृथ्वी वर्ष
बृहस्पति ग्रह का घूर्णन (1 दिन)9.93 घण्टे
बृहस्पति ग्रह बुध की त्रिज्या69,911 किलोमीटर
बृहस्पति ग्रह का द्रव्यमान1.898×1027 किलोग्राम
बृहस्पति ग्रह का क्षेत्रफल 61.42×109 वर्ग किलोमीटर
बृहस्पति गल ग्रह का औसत घनत्व1.33 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर
बृहस्पति ग्रह की सतह का गुरुत्वाकर्षण24.79 मीटर प्रति सेकेंड2
बृहस्पति ग्रह का पलायन वेग59.5 किलोमीटर प्रति सेकेंड
ज्ञात प्राकृतिक उपग्रह (चन्द्रमाएँ)कुल 79 (53 पुष्टि,26 पुष्टि शेष)

क्योंकि बृहस्पति पूरी तरह से गैस से निर्मित है, जिसका वायुमंडल ज्यादातर हाइड्रोजन एवं हीलियम से मिलकर बना है, इसलिए बृहस्पति पर तो जीवन उपस्थित नहीं है।

लेकिन बृहस्पति के कुछ चंद्रमाओं जैसे [‘आइओ'(IO) एवं ‘यूरोपा'(Uropa)] पर जीवन के मौजूद होने की संभावना है, क्योंकि इन चंद्रमाओं के क्रस्ट के भीतर जल के बड़े स्रोत या फिर जल के बड़े बड़े समुद्र के होने की सम्भावना है।

बृहस्पति ग्रह पर किये गए मिशन – बृहस्पति पर आजतक 11 मिशन किये जा चुके हैं, जिनमें पहला मिशन नासा द्वारा 3 दिसम्बर 1973 को पायनियर 10 (Pioneer 10) किया गया था।बृहस्पति ग्रह पर भविष्य में 5 मिशन और किये जाने हैं।

बृहस्पति ग्रह के प्राकृतिक उपग्रह – इस विशालकाय ग्रह के पास खुद के 79 से अधिक प्राकृतिक उपग्रह (चंद्रमा) होने की आशंका है। जिनमें से 53 चंद्रमा के पाए जाने की पुष्टि हो चुकी है जबकि 26 की अभी भी जांच चल रही है।

बृहस्पति के रोचक तथ्य – बृहस्पति का उपग्रह गेनिमीड संपूर्ण सौरमण्डल का सबसे विशालकाय उपग्रह है।

शनि (Saturn planet in hindi)

शनि सूर्य से छठा एवं हमारे सौरमण्डल में दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है, जो कि बर्फीले अवशेषों द्वारा बने  शानदार छल्लों/रिंग्स से घिरा हुआ है, शनि ग्रह के पास सात रिंग्स और उनके बीच कई अंतराल और विभाजन है।

शनि भी बृहस्पति की ही तरह गैस से निर्मित एक गैस जॉयंट है, जो कि ज्यादातर हाइड्रोजन और हीलियम आदि गैसों से मिलकर बना है, जिस कारण इसकी सतह पृथ्वी की भाँति ठोस तो नहीं है, लेकिन इसका केंद्र काफी ठोस एवं सघन है जो कि लोहे और निकिल से मिलकर बना है।

Saturn
Saturn
शनि की कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ (Information about Saturn planet in hindi)
शनि ग्रह की सूर्य से दूरी1,426,725,400 किलोमीटर
शनि ग्रह द्वारा सूर्य की परिक्रमा में लिया जाने वाला समय (1 वर्ष)29.45 पृथ्वी वर्ष
शनि ग्रह का घूर्णन (1 दिन)10 घण्टे 42 मिनट
शनि ग्रह बुध की त्रिज्या58,232 किलोमीटर
शनिग्रह का द्रव्यमान5.683×1026 किलोग्राम
शनि ग्रह का क्षेत्रफल 42.7 अरब वर्ग किलोमीटर
शनि गल ग्रह का औसत घनत्व0.68 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर
शनि ग्रह की सतह का गुरुत्वाकर्षण10.44 मीटर प्रति सेकेंड2
शनि ग्रह का पलायन वेग35.5 किलोमीटर प्रति सेकेंड
ज्ञात प्राकृतिक उपग्रह (चन्द्रमाएँ)कुल 82 (53 पुष्टि, 29 पुष्टि शेष)

यदि शनि पर जीवन की बात करें तो ये काफी बेतुका सा लगेगा क्योंकि शनि ग्रह का वातावरण इस ग्रह पर जीवन की इजाज़त नहीं देता।

लेकिन शनि के उपग्रह इंसेलेडस (Enceladus) और टाइटन (Titan) ऐसे उपग्रह हैं जिन पर जल के बड़े भंडार मौजूद हो सकते हैं तथा जीवन जीने योग्य स्थितियाँ मौजूद हो सकती हैं।

शनि ग्रह पर किये गए मिशन – शनि पर आजतक 4 मिशन किये जा चुके हैं एवं शनि के ग्रह टाइटन पर भी जीवन के मौजूद होने की आशंका में आजतक 2 मिशन किये जा चुके हैं जिनमे पहला मिशन यूरोपीय स्पेस एजेंसी द्वारा 14 जनवरी 2005 को किया गया था।

शनि के प्राकृतिक उपग्रह – शनि के पास सर्वाधिक 82 प्राकृतिक उपग्रह (चंद्रमा) होने की आशंका है।जिनमें से 53 चंद्रमा के पाए जाने की पुष्टि हो चुकी है जबकि 29 की अभी भी जांच चल रही है।

शनि से जुड़ा रोचक तथ्य – कल्पना करना मुश्किल है, लेकिन शनि ग्रह के गैस निर्मित होने के कारण यह हमारे सौरमण्डल में एकमात्र ऐसा ग्रह है जिसका औसत घनत्व पानी से कम है। इसलिए यदि शनि ग्रह से भी बड़ा और विशाल जलाशय मौजूद हो जिसमें शनि को अच्छी तरह रखा जा सके तो यह विशाल गैसीय ग्रह उस जलाशय में तैरने लगेगा।

अरुण (Uranus planet in hindi)

अरुण हमारे सौरमण्डल का सूर्य से सातवाँ एवं आकार की दृष्टि से तीसरा सबसे बड़ा ग्रह है। जो आकार में पृथ्वी से 4 गुना बड़ा है।

सूर्य से बहुत अधिक दूर होने के कारण अरुण बेहद ही ठंडा ग्रह है, सूर्य का प्रकाश अरुण तक पहुंचने में 2 घंटे 40 मिनट का समय लगाता है।

अरुण का वातावरण भी हाइड्रोजन, हीलियम, अमोनिया एवं मीथेन जैसी गैसों से मिलकर बना है। मीथेन के कारण ही अरुण का रंग हमें नीला सा दिखाई देता है। हमारे सौरमण्डल में शनि के बाद अरुण दूसरा सबसे कम घनत्व वाला ग्रह है।

Uranus
Uranus
अरुण की कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ (Information about Uranus planet in hindi)
वरुण ग्रह की सूर्य से दूरी2,870,658,000 किलोमीटर
वरुण ग्रह द्वारा सूर्य की परिक्रमा में लिया जाने वाला समय (1 वर्ष)84.02 पृथ्वी वर्ष
वरुण ग्रह का घूर्णन (1 दिन)17 घण्टे 14 मिनट
वरुण ग्रह बुध की त्रिज्या25,362 किलोमीटर
वरुण ग्रह का द्रव्यमान8.681×1025 किलोग्राम
वरुण ग्रह का क्षेत्रफल 8.083 अरब वर्ग किलोमीटर
वरुण ग्रह ग्रह का औसत घनत्व1.27 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर
वरुण ग्रह की सतह का गुरुत्वाकर्षण8.87 मीटर प्रति सेकेंड2
वरुण ग्रह का पलायन वेग21.3 किलोमीटर प्रति सेकेंड
ज्ञात प्राकृतिक उपग्रह (चन्द्रमाएँ)27

अरुण ग्रह पर जीवन के पनपने की दूर – दूर तक कोई आस नहीं दिखती क्योंकि ये ग्रह बेहद ही ठंडा है, सूर्य से बहुत ही दूर मौजूद होने के कारण इसका तापमान -224℃ तक भी पहुँच जाता है। इसके अलावा इस ग्रह पर लगातार चलने वाली हवाएँ बेहद ही भयानक हैं जो  900 किमी./घण्टे तक की गति से चलती हैं।

अरुण ग्रह पर किये गए मिशन – अरुण ग्रह की जानकारी के लिए आज तक अरुण तक सिर्फ एक ही यान Voyager-2 (वॉयेजर-2) पहुँच पाया है, जो नासा द्वारा 24 जनवरी 1986 को प्रक्षेपित किया गया था।

वरुण (Neptune Planet in hindi)

वरुण ग्रह सूर्य से आठवाँ एवं हमारे सौरमण्डल का आखिरी ग्रह है। आकार की दृष्टि से वरुण हमारे सौरमण्डल का चौथा सबसे विशाल ग्रह है। जो पृथ्वी के आकार का लगभग चार गुना है।

यह विशाल बर्फीला ग्रह हमारे सौरमण्डल (Solar system in hindi) का वह पहला ग्रह है, जिसकी खोज एकदम सटीक गणितीय गणनाओं के कारण हुई।

वरुण ग्रह का 80% द्रव्यमान पानी, मीथेन एवं अमोनिया के गर्म सघन द्रव से बना है। इसलिए वरुण जोवियन्स ग्रहों में सबसे अधिक सघन ग्रह है। साथ ही साथ वरुण का चुम्बकीय क्षेत्र पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र से 27 गुना ज्यादा मजबूत है।

neptune
Neptune
वरुण की कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ (Information about Neptune planet in hindi)
अरुण ग्रह की सूर्य से दूरी 4,498,396,000 किलोमीटर
अरुण ग्रह द्वारा सूर्य की परिक्रमा में लिया जाने वाला समय (1 वर्ष)164.79 पृथ्वी वर्ष
अरुण ग्रह का घूर्णन (1 दिन)16 घण्टे 7 मिनट
अरुण ग्रह बुध की त्रिज्या24,622 किलोमीटर
अरुण ग्रह का द्रव्यमान1.02×1026 किलोग्राम
अरुण ग्रह का क्षेत्रफल7.618 अरब वर्ग किलोमीटर
अरुण ग्रह ग्रह का औसत घनत्व1.64 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर
अरुण ग्रह की सतह का गुरुत्वाकर्षण11.15 मीटर प्रति सेकेंड2
अरुण ग्रह का पलायन वेग 23.6 किलोमीटर प्रति सेकेंड
ज्ञात प्राकृतिक उपग्रह (चन्द्रमाएँ)14

वरुण का सूर्य से इतना दूर मौजूद होने एवं इसके कठोर वातावरण के चलते वरुण पर भी जीवन की उपस्थिति नहीं है।

वरुण पर चलने वाली हवाएँ इतनी तेज हैं कि 1200 किमी./घण्टा तक कि गति प्राप्त कर लेती हैं, जो पृथ्वी पर चलने वाली सबसे तेज हवाओं से भी नौ गुना तेज हैं,

वरुण ग्रह पर किये गए मिशन – वरुण ग्रह पर भी आजतक सिर्फ नासा का Voyager 2 ही पहुँच पाया है। एवं भविष्य में 2024 एवं 2038 में चीन (CNSA) वरुण ग्रह पर मिशन करने जा रहा है।

वरुण ग्रह के रोचक तथ्य – वरुण ग्रह इतना धीमा घूमता है कि सन 1846 में हुई वरुण की खोज के बाद से इसने सूर्य की एक परिक्रमा 2011 में पूरी की है।

धूमकेतु (Comets in hindi)

धूमकेतु बेहद ही छोटे एवं सूर्य से काफी दूर मौजूद होते हैं, ये धूमकेतु धूल, चट्टान एवं बर्फ के गोले मात्र हैं। जब कभी ये धूमकेतु सूर्य के नज़दीक पहुंच जाते हैं तो सूर्य से दूरी के कम होने के कारण गर्मी बढ़ने लगती है, जिस कारण इस बढ़ती गर्मी के चलते धूमकेतु की बर्फीली सतह आयनित होने लगती है अर्थात इसकी ठोस सतह गर्मी के कारण गैस में परिवर्तित होने लगती है, और यह गैसें धूमकेतु की पुंछ सी दिखाई पड़ती है, इसी पुंछ के कारण इन बर्फीली वस्तुओं का नाम धूमकेतु पढा।

comets
comets
image souse – CSA

किसी धूमकेतु की सबसे कम समय की कक्षा 200 साल की हो सकती है, माना जाता है कि इस तरह की कक्षा वाले धूमकेतुओं का निर्माण काइपर बेल्ट में हुआ होगा, एवं सबसे अधिक कक्षा वाले धूमकेतु 1000 साल की कक्षा वाले भी हो सकते हैं, जिनका निर्माण आर्ट क्लाउड में माना जाता है।

मिशन – धूमकेतुओं पर आजतक विश्व भर के अलग अलग देशों द्वारा कुल 23 मिशन किये जा चुके हैं। भविष्य में धूमकेतुओं के अध्ययन के लिए यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) एवं चीन (CNSA) मिशन करने जा रहे हैं।

काइपर घेरा (Kuiper Belt in hindi)

हमारे सौर मण्डल में वरुण ग्रह के बाद मौजूद एक बड़ा सा घेरा है, जो कि अनगिनत धूमकेतुओं, बौने ग्रहों एवं अन्य बर्फीले निकाय से बना हुआ एक घेरा है, काइपर बेल्ट भी क्षुद्रग्रह बेल्ट के समान सौर मण्डल (Solar system in hindi) के निर्माण के इतिहास को दर्शाता है।

हालांकि काइपर घेरा एक पतली सी पट्टी ना होकर काफी मोटा एक घेरा है, जो सूर्य से 30 AU (AU = 14 करोड़ 96 लाख किलोमीटर) की दूरी से 50 AU तक की दूरी तक मौजूद है। इस घेरे में 3 बौने ग्रह हाउमिया (Haumea), मेकीमेकी (Make-make) एवं कभी हमारे सौर मण्डल का नौवां ग्रह कहा जाने वाला ग्रह प्लूटो (Pluto) भी मौजूद है।

Kuiper Belt
Kuiper Belt

सूर्य से काफी दूर मौजूद होने के कारण काइपर घेरा बेहद ही ठंडा है, जहाँ हालांकि ऊर्जा के अभाव में जीवन का मौजूद होना नामुमकिन तो लगता है लेकिन इस सबकी पूर्ण जानकारी लेने के लिए वैज्ञानिकों द्वारा काइपर घेरे की जानकारी लेने के लिए एक यान भेजा गया है ताकि काइपर घेरे में अन्य चीजों का पता लगा सके जो 2015 में प्लूटो (pluto) को पार कर चुका है।

काइपर घेरा वास्तव में अंतरिक्ष में एक सीमावर्ती घेरा है, यह एक ऐसी जगह है जिसे हम हाल ही में खोजना शुरू कर रहे हैं और इस जगह के लिए हमारी समझ अभी भी विकसित हो रही है।

काइपर बेल्ट पर किये गए मिशन – काइपर घेरे में मौजूद किसी वस्तु का अध्ययन करने के लिए आजतक सिर्फ एक मिशन किया गया है,जो नासा द्वारा 1 जनवरी 2019 में किया गया था। जिसमें नासा का New Horizons स्पेस क्राफ्ट शामिल है। एवं काइपर घेरे की वस्तु की जाँच के लिए भविष्य में चीन भी एक मिशन करने जा रहा है।

प्लूटो/यम (Pluto in hindi)

सूर्य से 39 AU की दूरी (एक AU = 14 करोड़ 96 लाख किलोमीटर अर्थात सूर्य से पृथ्वी तक कि दूरी) पर मौजूद बौना ग्रह प्लूटो काइपर घेरे में सबसे बड़ी ज्ञात वस्तु है।

1930 में खोजी गयी इस वस्तु को हमारा नौवां ग्रह माना गया था लेकिन आने वाले समय में काइपर घेरे में इससे मिलते जुलते अन्य बहुत से बर्फीले पिंड मिले जिसके बाद प्लूटो को पुनः वर्गीकृत करते हुए इसे बौने ग्रह के रूप में अपनाया गया।

pluto
pluto

प्लूटो की कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ (Information about Pluto in hindi)

प्लूटो ग्रह की सूर्य से दूरी 5,910,000,000 किलोमीटर
प्लूटो ग्रह द्वारा सूर्य की परिक्रमा में लिया जाने वाला समय (1 वर्ष)247.69 पृथ्वी वर्ष
प्लूटो ग्रह का घूर्णन (1 दिन)6.3874 पृथ्वी दिन
प्लूटो ग्रह बुध की त्रिज्या1,185 किलोमीटर
प्लूटो ग्रह का द्रव्यमान1.2×1022 किलोग्राम
प्लूटो ग्रह का क्षेत्रफल17,790,000 अरब वर्ग किलोमीटर
प्लूटो ग्रह ग्रह का औसत घनत्व 1.88 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर
प्लूटो ग्रह की सतह का गुरुत्वाकर्षण0.62 मीटर प्रति सेकेंड2
प्लूटो ग्रह का पलायन वेग1.212 किलोमीटर प्रति सेकेंड
ज्ञात प्राकृतिक उपग्रह (चन्द्रमाएँ)5

प्लूटो ग्रह पर किये गए मिशन – बौने ग्रह प्लूटो पर आजतक सिर्फ एक मिशन नासा द्वारा 14 जुलाई 2015 को सफलतापूर्वक किया गया है।

बिखरी डिस्क (Scattered disc in hindi)

हमारे सौरमण्डल में सूर्य से करीब 35 AU से 100 AU तक फैली एवं अनगिनत छोटी और बर्फीले पिंड तथा विभिन्न वस्तुओं के समूह से निर्मित इस डिस्क को वैज्ञानिकों द्वारा बिखरी डिस्क (Scattered disc) या बिखरी हुई डिस्क नाम दिया गया है।

जो जायज भी लगता है क्योंकि इस डिस्क एवं इसमें मौजूद बहुत से पिंडों की कक्षाएं पूरी तरह से अनियमित या बिखरी हैं। इसी वजह से ये डिस्क कई जगहों पर काइपर बेल्ट के साथ भी मिलती हुई पाई गई है।

कुछ मॉडलों के अनुसार Scattered disc में मौजूद वस्तुओं की इस अनियमित गति का कारण यह माना जाता है कि शायद शुरुआत में काइपर बेल्ट में मौजूद ज्यादातर पिंडों एवं वस्तुओं पर वरुण एवं अन्य गैसीय ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण बल का भी प्रभाव रहा होगा जिस वजह से इनकी गति में हुए परिवर्तन एवं इनकी आपस में हुई टक्करों से इनकी कक्षाएं अस्थिर कक्षाओं में स्थानांतरित हो गए।

इस डिस्क पर मौजूद सबसे बड़ी वस्तु एरिस (Eris) है। जो कि आकार की दृष्टि से हमारे सौरमण्डल का सबसे बड़ा बौना ग्रह (Dwarf Planet) है।

एरिस (Eris in hindi)

5 जनवरी 2005 से पहले प्लूटो हमारे सौरमण्डल (Solar system in hindi) का नौवाँ ग्रह माना जाता था लेकिन 5 जनवरी 2005 को प्लूटो के जैसा ही आकार का एक और पिंड खोजा गया जिसका नाम एरिस दिया गया, अब बहुत से वैज्ञानिक यह तर्क दे रहे थे कि एरिस हमारे सौरमण्डल का 10 वाँ ग्रह है, लेकिन क्योंकि एरिस के आस पास के स्थान में इस तरह के और भी बहुत से पिंड मौजूद थे इस वजह से वैज्ञानिकों को ग्रह की परिभाषा में बदलाव करना पढ़ा और इस नयी परिभाषा के अनुसार प्लूटो एवं एरिस को बौने ग्रह का दर्जा दिया गया। एरिस हमारे सौरमण्डल का सबसे बड़ा बौना ग्रह (Dwarf Planet) है।

एरिस-बौना-ग्रह
एरिस-बौना-ग्रह

हीलीयोस्फीयर (Heliosphere in hindi)

हम सब यह तो जानते ही हैं कि अंतरिक्ष की गहराइयों में आये दिन ऐसी घटनाएं एवं धमाके होते रहते हैं, जिनके फलस्वरूप उनसे उत्सर्जित हानिकारक कण एवं भयानक ब्रह्मांडीय किरणें (Cosmic Rays) पृथ्वी एवं इसमें मौजूद जीवन को पूरी तरह से नष्ट करने में सक्षम होती हैं, तो अब सबसे बड़ा सवाल उठता है कि यदि ऐसा है तो पृथ्वी एवं हम आज तक एकदम सुरक्षित कैसे हैं, इसका जवाब है हीलीयोस्फीयर (Heliosphere)

हीलीयोस्फीयर का निर्माण एवं कार्य विधि

सूर्य प्रकाश एवं ऊर्जा के साथ साथ अनेक आवेशित कणों के प्रवाह का भी कारक है, एवं सूर्य लगातार ही इन आवेशित कणों के प्रवाह को चालू रखता है।

हालाँकि ये प्रवाह पृथ्वी एवं उसमें उपस्थित जीवन के लिए काफी भयानक है, लेकिन अपने चुम्बकीय क्षेत्र के कारण पृथ्वी इन आवेशित कणों के इस प्रवाह को बाहर धकेल देती है, जिसके कारण हमें उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव पर अरोरा (Aurora) एवं बोरयालिस (Borealis) जैसी घटनाएँ देखने को मिलती हैं।

aurora
aurora

सूर्य से निकलने वाला आवेशित कणों का यह प्रवाह सौरमण्डल में मौजूद हर ग्रह, काइपर घेरे एवं बिखरी डिस्क (Scattered disc) से गुजरने के बाद आगे चलकर इंटरस्टेलर माध्यम द्वारा बाधित किया जाता है जिसके पश्चात आवेशित कणों का यह समूह सौरमण्डल में एक बुलबुले का आकार ले लेता है,जो कि हीलीयोस्फीयर कहलाता है।

हीलीयोस्फीयर सूर्य से 123 Au की दूरी पर मौजूद है,जो हमेशा घटते एवं बढ़ते (fluctuate) रहता है, और अंतरिक्ष से आने वाली हानिकारक। ब्रह्मांडीय किरणों(Cosmic Rays) को अपने चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव के कारण अंतरिक्ष में वापस मोड़ देता है।

Heliosphere का आकार एक लंबे हवा के झोंके जैसा है, क्योंकि यह अंतरिक्ष में तारों के मध्य सूर्य के साथ चलता है। इसी कारण से अंतरिक्ष में रहते हुए भी हम बिना किसी हानिकारक प्रभाव के जीवित हैं। क्योंकि सूर्य हमें जीने के लिए ऊर्जा देने के साथ साथ हमारी रक्षा भी करता है।

Heliosphere
Heliosphere
image source – Wikipedia

ग्रह 9 या प्लैनेट 9 (Planet 9)

वैज्ञानिकों के अनुसार काइपर बेल्ट एवं बिखरी डिस्क (Scattered disc) से काफी दूर एक बहुत बड़ा ग्रह मौजूद हो सकता है। उनके अनुसार यह इतनी दूर मौजूद है कि इसको सूर्य का एक चक्कर लगाने में करीब 10,000 से 20,000 पृथ्वी वर्ष लगते होंगे एवं यह आकार में पृथ्वी से 4 से 5 गुना बड़ा एवं भार में पृथ्वी से लगभग 10 गुना भारी हो सकता है।

यह सारे आंकड़े अभी निश्चित नहीं हैं, क्योंकि अभी तक हमारे सौरमण्डल (solar system in hindi) में इस तरह के किसी ग्रह के मौजूद होने के कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं, अर्थात अभी तक इस ग्रह के बारे में वैज्ञानिकों के सभी तथ्य एक कल्पना मात्र हैं।

तो आखिर वह क्या कारण था जिससे वैज्ञानिकों को ऐसी कल्पना करनी पड़ी – सन 2015 में जब वैज्ञानिकों के एक समूह द्वारा काइपर बेल्ट का अध्ययन किया जा रहा था तो उन्होंने पाया कि काइपर बेल्ट में मौजूद कई बर्फीले पिंड प्रबलता से अपनी कक्षा से बाहर को खिंचे जा रहे हैं,जिस कारण काइपर बेल्ट एवं scattered disc में मौजूद बहुत से पिंडों की कक्षा अनियमित है।

इस कारण वैज्ञानिकों को यह विचार आया कि शायद हमारे सौरमण्डल में एक और ग्रह मौजूद है जो काफी बड़ा एवं काफी दूर मौजूद है जो अपने बेहद ही प्रबल गुरुत्वाकर्षण बल से इन सभी पिंडों की गति को प्रभावित कर रहा है।उनकी यह कल्पना मजबूत तब हो गयी जब उनके द्वारा की गई एक गणितीय गणना से भी इस बात का पुख्ता सबूत मिला कि हमसे दूर जरूर ही ऐसा कोई विशाल ग्रह उपस्थित है।

हम प्लैनेट 9 को अभी तक ढूँढ नहीं पाए हैं क्योंकि वह शायद हमसे इतना दूर मौजूद है कि जहाँ तक सूर्य का प्रकाश बेहद ही कम मात्रा में पहुँच पाता है एवं साथ ही साथ यदि इतनी दूरी पर मौजूद इस ग्रह को देखने के लिए हम दूरबीनों का प्रयोग भी करते हैं तो उस दिशा में मौजूद अन्य आकाशीय पिंड, तारों एवं चन्द्रमन की अधिक चमक के कारण इतनी दूर की किसी वस्तु को ढूँढना काफी कठिन हो जाता है।

आर्ट क्लाउड (Oort cloud)

आर्ट क्लाउड एक काल्पनिक गोला है जो कि कई खरबों छोटे बड़े बर्फीले पिंडों का एक समूह है। आर्ट क्लाउड सौरमण्डल में हमारी प्रेक्षण की अंतिम सीमा है, क्योंकि इसके आगे हम कुछ नहीं जानते। वैज्ञानिकों के अनुसार ऑर्ट क्लाउड का सबसे भीतरी हिस्सा सूर्य से करीब 2000 AU से 5000 AU के बीच हो सकता है,जबकि इसका सबसे बाहरी हिस्सा सूर्य से करीब 10,000 AU से 100,000 AU के बीच कहीं भी हो सकता है।

यह अभी तक कल्पना का विषय इसलिए बना हुआ है क्योंकि वैज्ञानिक अभी भी इसके होने का कोई भी सबूत नहीं जुटा पाए हैं, जिसका सबसे बड़ा कारण इसका इतनी अधिक दूरी पर मौजूद होना है।चूँकि आर्ट क्लाउड में मौजूद पिंडों की गति एक सी न होकर अनियमित है इसलिए कई बार विभिन्न दिशाओं से आने वाले धूमकेतुओं की शुरुआती जगह आर्ट क्लाउड को माना जाता है।

Oort cloud
Oort cloud
image source – rocketstem.org

इस काल्पनिक गोले की कल्पना सर्वप्रथम जेन आर्ट ने की थी, एवं सन 1950 में इसे प्रस्तावित करने के लिए आर्ट ने ही यह तर्क दिया था कि अधिक लंबी अवधि वाले धूमकेतु जो विभिन्न दिशाओं से आते हैं,वे एक निश्चित जगह से आ रहे हैं, जो हमारे सौरमण्डल की सबसे बाहरी जगह है, जिसका नाम दिया गया लंबी अवधि वाले धूमकेतुओं का घर (Home of Long-Period Comets), जिसे बाद में जेन आर्ट के नाम पर आर्ट क्लाउड नाम दिया गया।

Conclusion

हमारे द्वारा सौरमण्डल (solar system in hindi) के बारे में अधिक से अधिक जानकारी देने की पूर्ण कोशिश की गई है आशा है कि आपको इस लेख “Information about solar system in hindi” के माध्यम से सौरमण्डल एवं इसके विभिन्न तंत्रों के बारे में बहुत कुछ जानने को मिला होगा।

लेकिन अगर फिर भी इस विषय से जुड़ा आपका कोई सवाल या सुझाव रह गया हो तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं हमें आपकी मदद करते हुए बड़ी ख़ुशी होगी।

और हाँ इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूले।

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