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शुक्र ग्रह परिचय (Introduction to Venus Planet in hindi)

ब्रह्मांड की अभी तक ज्ञात सबसे बुद्धिमान प्रजाति इंसानों यानी कि हमारे द्वारा विज्ञान के क्षेत्र में लगातार किये गए प्रयोगों एवं विकासों के कारण आज हम इस स्थिति तक पहुंच चुके हैं कि हम अपनी दुनिया (पृथ्वी) को छोड़कर अन्य दुनियाओं के बारे में जानना चाहते हैं,एवं बहुत कुछ जान भी चुके हैं।

इसी जिज्ञासा के कारण आज हम अपने सौरमंडल में मौजूद एक अन्य दुनिया के बारे में जानेंगे। इस दुनिया को नाम दिया गया है शुक्र (Venus)। जिससे जुड़े अनेकों सवाल आपके मस्तिष्क में घूर्णन तथा परिक्रमा (Rotation and Revolution) कर रहे होंगे। जिनका जवाब आपको यह लेख पढ़ने के बाद अवश्य ही मिल जाएगा। तो चलिए शुरू करते हैं शुक्र ग्रह (Venus Planet in Hindi)  का ये आर्टिकल

venus planet in hindi
venus

Information about Venus Planet in hindi

सूर्य से नजदीकी के अनुसार शुक्र हमारे सौरमण्डल का दूसरा ग्रह है एवं इसकी संरचना के कारण यह ग्रह भी स्थलीय ग्रहों (Terrestrial planets) की श्रेणी में आता है।

शुक्र ग्रह का निर्माण भी अन्य 4 स्थलीय ग्रहों (Terrestrial planets) की ही भाँति 4.5 अरब साल पहले गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा गैस एवं धूल को आपस में मिला देने से हुआ।

Venus Planet in hindi

निर्माण एवं संरचना (formation and structure of Venus Planet in hindi)

पृथ्वी का जुड़वा ग्रह कहलाने वाला ग्रह शुक्र संरचना के आधार पर कई हद तक पृथ्वी से मेल खाता है। शुक्र में ठीक पृथ्वी की ही भाँति धात्विक कोर है जो संभवतः मुख्य रूप से लोहे और निकिल से बना है। जिसकी त्रिज्या करीबन 3200 किलोमीटर है,

कोर के ठीक ऊपर चट्टानी मेंटल मौजूद है जो शुक्र के कुल आयतन का सबसे बड़ा हिस्सा है, इसका तापमान लगभग पृथ्वी के मेंटल के तापमान से मेल खाता है।साथ ही शुक्र के मेंटल में मौजूद पदार्थ लगातार ही गतिमान अवस्था मे रहता है।

पृथ्वी की ही भाँति शुक्र के सबसे ऊपरि भाग में क्रस्ट (पतली परत) मौजूद है। परन्तु शुक्र के मेंटल के पदार्थ की लगातार गति के कारण ही शुक्र के क्रस्ट पर अक्सर तनाव देखा जाता है (रडार फोटोग्राफी के जरिये), एवं इस तनाव के कारण ही अक्सर शुक्र पर विवर्तनिक विकृति (Tectonic deformation) भी देखने को मिलती है।

Interiors of Venus and Earth
Image Credit- Sky&Telescope.Org

            शुक्र की कुछ महत्वपूर्ण भौगोलिक जानकारियाँ (Information about Venus Planet)

शुक्र की सूर्य से दूरी108,209,475 किमी
शुक्र द्वारा सूर्य की परिक्रमा में लिया जाने वाला समय224.7 पृथ्वी दिन
शुक्र ग्रह का घूर्णन (1 दिन)243 पृथ्वी दिन
शुक्र ग्रह की त्रिज्या6,051.8 किमी
क्षेत्रफल4.6×102 किमी.2
द्रव्यमान4.87×1024 किग्रा
घनत्व5.24 ग्राम/सेमी.3
सतह का गुरुत्वाकर्षण8.87 मी./सेकेंड2
पलायन वेग10.4 किमी./सेकंड
ज्ञात प्राकृतिक उपग्रह0
Information about Venus Planet in hindi

शुक्र ग्रह की सतह (Surface of Venus Planet in hindi)

शुक्र की सतह पर अनेकों पहाड़, घाटियाँ एवं कई हजारों जवालामुखी मौजूद हैं, शुक्र में मौजूद सबसे बड़ा पहाड़ “मैक्सवेल मोंटेस” करीबन 8.8 किलोमीटर ऊँचा है जो लगभग पृथ्वी के “माउण्ट एवरेस्ट” के ही समान है।

एवं शुक्र पर मौजूद इन हजारों ज्वालामुखी के गैसीय उत्सर्जन के कारण ही शुक्र की सतह का तापमान आज हमारे सौरमण्डल में मौजूद ग्रहों में सबसे अधिक है, जो कि 471℃ तक भी पहुंच जाता है, यह तापमान सूर्य के सबसे नजदीक मौजूद ग्रह बुध से भी अधिक है।

शुक्र के इस भयानक गर्म वातावरण के कारण शुक्र की सतह तक आने वाले उल्कापिंडों में सिर्फ बड़े आकार के उल्कापिंड ही साथ तक पहुंच पाते हैं क्योंकि छोटे आकार के उल्कापिंड इस भयानक गर्मी के कारण साथ पर पहुंचने से पहले ही खत्म हो जाते हैं, एवं शुक्र की सतह तक बड़े आकार के उल्कापिंडों के पहुंचने के कारण शुक्र की सतह पर बने सभी गड्ढ़े आकार में अत्यधिक बड़े पाए जाते हैं, जिनमें सभी गड्ढे 1.5 किमी. से अधिक ही हैं।

Surface of Venus Planet in hindi

शुक्र ग्रह की सतह पर बहुत घना वायुमंडल होने के कारण यह सूर्य के 70 फीसदी प्रकाश को सीधे परावर्तित कर देता है इसलिए यह रात के आसमान में सबसे अधिक चमकीला दिखाई देने वाला ग्रह है। चंद्रमा के बाद रात के आसमान में सबसे अधिक चमकीला दिखाई देने वाला ऑब्जेक्ट शुक्र ग्रह ही होता है। इसी कारण से इसे “भोर का तारा” अथवा “सांझ का तारा” भी कहा जाता है।

शुक्र की सतह पर मौजूद पहाड़ इत्यादि पृथ्वी के ही समान ग्रे से रंग के हैं परंतु शुक्र के वायुमंडल में मौजूद साल्फ्यूरिक एसिड तथा कार्बन डाइऑक्साइड के बादलों की मोटी परत से जब प्रकाश गुजरता है तो इन बादलों द्वारा उस प्रकाश क अवशोषण कर लिया जाता है, अतः शुक्र की सतह हमे हल्की पीली दिखाई देती है।

घूर्णन एवं परिक्रमा (Rotation and Revolution of Venus planet in hindi around sun)

चूँकि वैज्ञानिक मानते आए हैं कि हमारे सम्पूर्ण सौरमण्डल का निर्माण एक ही विशाल घूमते गैस के बादल से हुआ है अतः यह स्पष्ट है कि हमारे सौरमण्डल पर मौजूद सभी ग्रहों की गति एक ही दिशा की ओर हो। लेकिन ऐसा नहीं है हमारे सौरमण्डल में दो ग्रह ऐसे भी हैं जिनके घूर्णन की दिशा सौरमण्डल में मौजूद अन्य सभी ग्रहों से विपरीत है – जो हैं शुक्र एवं अरुण (Uranus)

पृथ्वी के घूर्णन की दिशा वामावर्त (counterclockwise) है (उत्तरी ध्रुव से देखने पर)। जो कि अन्य ग्रहों बुध,मंगल,बृहस्पति,शनि,वरुण (Neptune) के लिए भी सही है परन्तु शुक्र एवं अरुण (Uranus) के लिए नहीं। शुक्र एवं अरुण (Uranus) के घूर्णन की दिशा दक्षिणावर्त (clockwise) है,जो कि सभी ग्रहों के विपरीत है।

Rotation of planets

इसके अलावा शुक्र ग्रह द्वारा दिखाया जाने वाला अन्य विचित्र व्यवहार यह भी है कि शुक्र का एक दिन यानी कि शुक्र को एक घूर्णन पूरा करने में लगा समय 243 पृथ्वी दिन के बराबर है जो की शुक्र ग्रह के एक वर्ष (225 पृथ्वी दिन) से भी बड़ा है।

शुक्र द्वारा दिखाए जाने इन विपरीत एवं विचित्र व्यवहारों को जानने के लिए आज तक वैज्ञानिकों द्वारा बहुत सी परिकल्पनायें (hypotheses) दी गयी हैं, लेकिन एक परिकल्पना जिसके आधार पर  शुक्र ग्रह के लिए इन घटनाओं को समझाया जा सकता है उसके अनुसार –

शुक्र का शुरुआती घूर्णन भी अन्य सभी ग्रहों के ही समान था परंतु कुछ समय बाद जैसे-जैसे शुक्र का वायुमण्डल अत्यंत घने एवं मोटे बादलों से भरने लगा वैसे-वैसे शुक्र के घने वायुमण्डल के कारण इसपर शुक्र के घूर्णन की दिशा के विपरीत वायुमंडलीय ज्वार उतपन्न हो गए।

अतः शुक्र के घूर्णन की गति एवं इसके विपरीत शुक्र के भीतर मौजूद वायुमंडलीय ज्वार द्वारा एक दूसरे पर डाले गए परस्पर विपरीत प्रभाव के फलस्वरूप कुछ समय बाद शुक्र घूर्णन करते हुए रुक गया होगा एवं उसके कुछ समय पश्चात वायुमंडलीय ज्वार के प्रबल प्रभाव के कारण शुक्र के घूर्णन की दिशा धीरे धीरे उसके अनुसार बन गयी होगी जो कि वर्तमान में भी वामावर्त (counterclockwise) बनी हुई है।

परन्तु शुक्र के वर्तमान घूर्णन की दिशा सूर्य के स्वयं के घूर्णन की दिशा के विपरीत है। इस घटना को प्रतिगामी घूर्णन (retrograde rotation) कहते हैं। जिस कारण सूर्य के प्रबल गुरुत्वीय खिंचाव की वजह से शुक्र का घूर्णन की गति अत्यधिक धीमी हो गयी है,साथ ही शुक्र के यह घूर्णन की गति लगातार धीमी हो रही है।

एक शोध के अनुसार 16 वर्षों के अंतराल में शुक्र के घूर्णन की गति में आई कमी के कारण शुक्र के एक दिन की अवधि में करीब 6.5 मिनट (पृथ्वी मानक के अनुसार) की बढ़ोतरी हुई। हालाँकि इसका कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि यह परिकल्पना पूर्ण रूप से सही है।

शुक्र ग्रह की कक्षा (Orbit of Venus planet in hindi)

शुक्र का अपनी कक्षा का एक चक्कर अर्थात सूर्य के चारों ओर एक चक्कर पूरा करने में 225 पृथ्वी दिन का समय लगता है। हमारे सौरमण्डल पर मौजूद सभी ग्रहों की कक्षा (Orbit) लगभग दीर्घवृत्ताकार है, परन्तु शुक्र की कक्षा अन्य सभी ग्रहों की तुलना में सर्वाधिक व्रत्ताकर है जिसे कई बार गणनाओं के लिए एक पूर्ण व्रत्त माना जाता है।

चूँकि शुक्र ग्रह अपने अक्ष पर 3° (डिग्री) ही झुका हुआ है,जो कि अन्य ग्रहों की तुलना में बहुत कम है इसलिए अक्सर शुक्र ग्रह के इस झुकाव को नगण्य मान लिया जाता है। साथ ही इस झुकाव के बावजूद भी शुक्र ग्रह पर ध्यान देने योग्य मौसम परिवर्तन नहीं देखने को मिलता है।

शुक्र ग्रह का वायुमण्डल (Atmosphere of Venus planet in hindi)

शुक्र की सतह पर मौजूद कई हजारों ज्वालामुखियों से होने वाले लगातार गैसीय उत्सर्जन के फलस्वरूप विभिन्न गैसें शुक्र के वायुमण्डल में पहुँच गयी एवं वहाँ पर कई अधिक समय तक रुककर बेहद ही सघन वायुमण्डल का निर्माण किया। अर्थात सौरमण्डल में मौजूद सभी ग्रहों में सबसे अधिक सघन वायुमण्डल शुक्र का ही है।

शुक्र का यह भयानक वायुमण्डल विभिन्न हानिकारक गैसों से मिलकर बना है। जिनमें से 96% भागीदारी कार्बनडाई ऑक्साइड की तथा 3.5 % भागीदारी नाइट्रोजन की है। इसके अलावा भी बहुत सी अन्य गैसें हैं जिनके पाए जाने की पुष्टि हुई है, जैसे – कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, ऑर्गन,हीलियम आदि।

शुक्र के इस सघन एवं मोटे वायुमण्डल पर मौजूद कार्बनडाई ऑक्साइड द्वारा किये गए ग्रीनहाऊस प्रभाव के कारण शुक्र पर आने वाली सूर्य की गर्मी को वहीं रोक लिया जाता है, जिस कारण से शुक्र की सतह का तापमान 471℃ तक पहुंच जाता है।

इसके अलावा शुक्र के वायुमण्डल की कई परतें हैं जिनमें तापमान भिन्न भिन्न रहता है। सतह से दूरी बढ़ने के साथ साथ तापमान कम होने लगता है, इसी कारण शुक्र की सतह से करीब 48 से 50 किलोमीटर ऊपर मौजूद बादलों में तापमान लगभग पृथ्वी की सतह के तापमान के बराबर होता है।

शुक्र के वायुमण्डल के ऊपरी हिस्से में अत्यधिक तीव्र गति से हवाएं चलती हैं, जिनकी दिशा पूर्व से पश्चिम की ओर होती है साथ ही ये तूफानी हवाएं ग्रह के घूर्णन से करीब 60 गुना अधिक तेजी से चलती हैं। जिस कारण से शुक्र के वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में मौजूद बादल प्रत्येक 4 पृथ्वी दिनों में शुक्र का एक चक्कर पूर्ण कर लेते हैं। ये तूफानी हवाएँ सतह की ओर जाने पर घटने लगती हैं।

शुक्र के वायुमंडल द्वारा शुक्र की सतह पर अत्यधिक दबाव लगाया जाता है, जो कि करीब 93 बार (bar) है। अर्थात पृथ्वी की सतह पर मौजूद दबाव का 93 गुना। पृथ्वी पर इतना अधिक दबाव हमें समुद्र में 1 किमी. नीचे जाने पर महसूस हो पाएगा। परन्तु वर्तमान की हमारी आधुनिकता के बावजूद भी हमारे पास ऐसे संसाधन नहीं हैं जिनसे हम ऐसी भयानक स्थितियों में भी जीवित रह पाएं।

शुक्र ग्रह का चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field of Venus planet in hindi)

लगभग पृथ्वी के ही समान आकार एवं कोर में पृथ्वी की ही भाँति मौजूद धातुओं के बावजूद भी शुक्र ग्रह का चुम्बकीय क्षेत्र पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के समान शक्तिशाली नहीं है, इसके पीछे का कारण शुक्र ग्रह की बेहद ही धीमी घूर्णन गति का होना माना जाता है।

जीवन (Life on Venus)

अग्रलिखित समस्त जानकारीयां पढ़कर आप स्वयं ही जान चुके होंगे कि शुक्र के इस भयानक वायुमण्डल के कारण वर्तमान में शुक्र पर हमारे जैसे जीवन का होना या फिर पाया जाना नामुमकिन होगा।

परन्तु इसके विपरीत कई आशावादी वैज्ञानिकों का यह मानना है कि शुक्र की सतह से 48 से 50 किमी. ऊपर जिस जगह का तापमान पृथ्वी के तापमान से मेल खाता है उस जगह पर भविष्य के वैज्ञानिक उपकरणों/साधनों का प्रयोग कर एक गतिमान कॉलोनी बसाई जा सकती है।

परन्तु यह विचार वर्तमान में सिर्फ एक सिध्दान्त ही है क्योंकि वर्तमान में हम इतने सक्षम नहीं हैं कि शुक्र ग्रह की भयानक परिस्थितियों के बीच इस सब के लिए कोई भी प्रयोग कर सकें।

मिशन (Mission on Venus planet in hindi)

सम्पूर्ण सौरमण्डल में हमारे सबसे नजदीक मौजूद ग्रह शुक्र है। अतः हमारे सौरमंडल पर वैज्ञानिकों द्वारा ग्रहों की खोजबीन के लिए सर्वप्रथम इसी ग्रह को चुना गया।

शुक्र पर सबसे पहला मिशन रूस द्वारा 1961 में किया गया था। इस मिशन के तहत रूस द्वारा तियाज़ेली स्पुतनिक (Tyazhely Sputnik) नामक अंतरिक्ष यान का सहारा लिया गया। परन्तु अंतरिक्ष यान में आई खराबी के कारण यह मिशन सफल नहीं हो सका।

अन्य 3 मिशन की नाकामी के बाद सन 1962 में नासा द्वारा शुक्र पहला सफल मिशन किया गया। इस मिशन के अंतर्गत नासा द्वारा मेरिनर 2 (mariner 2) नामक अंतरिक्ष यान का प्रयोग किया गया।

उसके पश्चात शुक्र पर आज तक कुल 46 मिशन किये जा चुके हैं जिनमें से कुल 26 मिशन सफल, 16 मिशन असफल तथा 4 मिशन ऑपरेशनल हैं।

इसके अलावा भविष्य में शुक्र ग्रह पर 6 अन्य मिशन किये जाने हैं, जिनमें से एक मिशन इसरो द्वारा 2025 में किया जाने निर्धारित है जिसको  शुक्रयान-1 नाम दिया गया है।

रोचक तथ्य (Interesting Facts about Venus planet in hindi)

(I) अन्य ग्रहों के विपरीत शुक्र ग्रह पर सूर्योदय पश्चिम दिशा से एवं सूर्यास्त पूर्व दिशा में होता है।

(II) रात्रि के आसमान में शुक्र की अत्यंत चमक के कारण शुक्र ही वह पहला ग्रह था जिसकी गति का अध्ययन इंसानों द्वारा किया गया था।

(III) शुक्र की चमक के कारण इसका नाम “Venus” रोमन साम्राज्य की सुंदरता एवं प्यार की देवी के नाम पर रखा गया।

(IV) लगभग समान आकार एवं बनावट होने के कारण शुक्र ग्रह को पृथ्वी को जुड़वा बहन कहा जाता है।

(V) जहाँ शुक्र को अपने अक्ष का एक चक्कर लगाने में 243 दिन का समय लगता है वहीं शुक्र के ऊपरी हिस्से में मौजूद वायुमण्डल को शुक्र का चक्कर लगाने में मात्र 4 दिन लगते हैं।

Read Also- सौर मण्डल Solar System in Hindi

निष्कर्ष (Conclusion)

आशा है कि इस लेख के माध्यम से शुक्र ग्रह के बारे में आपके सभी सवालों के उचित जवाब आपको मिल गए होंगे,चाहे फिर वह बात हो शुक्र ग्रह की भौगोलिक जानकारी,शुक्र के घूर्णन, वायुमण्डल या फिर शुक्र पर जीवन की उपलब्धता की।

लेकिन इस लेख शुक्र ग्रह (Venus Planet in Hindi) को पढ़ने के बाद भी अगर आपका कोई सवाल या सुझाव रह गया हो तो जरूर ही हमें comment section में जरूर बताएं, हम आपके सवालों का जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगे।

साथ ही इस लेख को अधिक से अधिक लोगों तक शेयर करें ताकि अन्य लोगों तक भी यह अहम जानकारियां पहुँच सकें।

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